नई द‍िल्ली। चीन ने अपने सैनिकों की तैनाती को लेकर नए नियम जारी किए हैं. इसके तहत अब किसी भी देश पर जवाबी कार्रवाई के लिए सेना को राष्ट्रपति की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी. सेना के अधिकारी अपने स्तर पर हमले का फैसला ले सकते हैं. ताइवान, जापान और फिलिपींस से युद्ध की आशंकाओं के बीच चीन ने यह बड़ा बदलाव किया है. चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक 1 अक्टूबर से नए कानून अमल में आ जाएंगे.

16 साल बाद चीन ने सैनिकों की तैनाती को लेकर नया कानून बनाया है. 82 अनुच्छेदों वाले इस कानून में राष्ट्रपति, सेना प्रमुख और मोर्चे पर तैनात सिपाहियों की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया गया है.

राष्ट्रपति से परमिशन लेने की जरूरत नहीं
सैन्य तैनाती को लेकर बनाए गए नए कानून के मुताबिक अब सेना को किसी भी देश के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं लेनी होगी. पहले जो नियम था, इसके मुताबिक एक प्लान को राष्ट्रपति के पास भेजना होता था. इसके बाद जवाबी कार्रवाई की मंजूरी मिलती थी.

अब कहा गया है कि सेना अपने स्तर से कार्रवाई करेगी और उसके बाद रिपोर्ट राष्ट्रपति और विधायिका को सौंप देगी. हालांकि, बड़े मसले में केंद्रीय सैन्य आयोग को कन्फिडेंस में लेने की बात कही गई है.

सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार
नए सैन्य तैनाती कानून में कहा गया है कि लड़ाई के वक्त चीन की सरकार और सेना सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगा सकेगी. किसी भी नागरिक को विवादित पोस्ट शेयर करने का अधिकार नहीं होगा. ऐसे पोस्ट को फर्जी करार देकर सेना के पास एक्शन का अधिकार होगा.

इसके अलावा उसके पास फेक न्यूज रोकने के लिए दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी बैन लगाने की पूरी आजादी रहेगी. वहीं सेना में भर्ती की आयु में चीन ने कोई बदलाव नहीं किया है.

हालांकि, नए नियमों में कहा गया है कि जो लोग युद्ध राहत, बचाव कार्यों में लगे होंगे, उन्हें सेना में शामिल नहीं किया जा सकता वहीं जब सेना जवाबी कार्रवाई कर रही होगी, तब उसके पास पूरे चीन में परिवहन, दूरसंचार, सूचना नेटवर्क, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, भोजन और वाणिज्य पर नियंत्रण लागू करने का अधिकार होगा.

- Legend News

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