अब वह दिन दूर नहीं जब भारत में भी पानी में चलने वाले बड़े-बड़े और आधुनिक जहाज बनेंगे। इस दिशा में जापानी शिपिंग कंपनी मित्सुई ओएसके लाइन्स (MOL) योजना बना रही है। 
भारत सरकार से हो रही है बात
एमओएल के दक्षिण एशिया एवं मध्य पूर्व प्रभारी कैप्टन आनंद जयरामन ने पत्रकारों से बातचीत में इस योजना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि एमओएल भारत में स्थानीय शिप बिल्डर्स से हाथ मिला कर यहीं जहाज बनाने की सोच रही है। वे इसके लिए भारत सरकार से भी बात कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि जहाज बनाने में भारतीय शिपयार्ड उनकी मदद करें। 
भारत की चौथी बड़ी शिपिंग कंपनी
एमओएल इंडिया (MOL India) इस समय फ्लीट साइज के हिसाब से भारत की चौथी बड़ी कंपनी है। इसके पास अभी इंडियन फ्लैग वाले 13 वैसल्स हैं जबकि इसके ऑपरेशन में कुल 33 वेसल्स यहां सेवाएं दे रहे हैं। कैप्टन आनंद जयरामन का कहना है कि वह भारत में दूसरे सबसे बड़े शिप ऑपरेटर बनना चाहते हैं। इसके लिए फ्लीट साइज बढ़ाना चाहते हैं। 
कैसे बनेंगे जहाज
एमओएल का कहना है कि वह भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम का हिस्सा बनना चाहते हैं। आनंद ने बताया कि भारत सरकार भी चाहती है कि देश में ही बड़े जहाज़ बनें। इसलिए वह सरकार से बात कर रहे हैं कि भारत में जहाज़ कैसे बनाए जा सकते हैं। हालांकि, पानी के बड़े जहाज़ बनाने का काम बहुत खर्चीला और बहुत ज्यादा तकनीकी विशेषज्ञता खोजता है। इसलिए वह किसी भारीय शिपयार्ड के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। हालांकि, इस बारे में किसी कंपनी से हाथ मिलाने से पहले कंपनी देखना चाहेगी कि वह इस काम में सक्षम भी है या नहीं। 
भारत की तरक्की में भागीदार बनना चाहते हैं
जयरामन ने कहा, "हम भारत की समुद्री तरक्की में भागीदार बनना चाहते हैं। हम ग्रीन शिपिंग में सबसे आगे रहना चाहते हैं।" ग्रीन शिपिंग का तात्पर्य ऐसे जहाज़ से है, जिनके चलाने से पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो। इसके साथ ही MOL इंडिया जल्द ही रेलवे लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी कदम रखने वाली है। इस बारे में कुछ घोषणा इस साल या अगले साल की शुरुआत में हो सकती है। उल्लेखनीय है कि शिपिंग मिनिस्ट्री देश में ही जहाज़ बनाने के काम को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं बना रहा है। एक योजना यह है कि भारत के दोनों समुद्री किनारों पर कम से कम तीन नए शिप बिल्डिंग क्लस्टर बनाए जाएं। इसके अलावा, कुछ मौजूदा परियोजनाओं को भी विकसित करने की योजना है। सरकार जहाज़ बनाने की योजना के तहत जापान और कोरिया की कंपनियों से भी बात कर रही है। सरकार चाहती है कि ये कंपनियां भारत में अपने कारखाने और जहाज़ मरम्मत की सुविधा स्थापित करें। 
अब तक दुनिया के सभी देशों पर चीन भारी पड़ता है। शिप बिल्डिंग में उसकी 68 फीसदी की हिस्सेदारी है। इसके बाद दक्षिण कोरिया और जापान का नंबर आता है। शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री में इस समय भारत की हिस्सेदारी एक फीसदी से भी कम है। 
-Legend News

 

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