निठारी हत्याकांड के दोषी ठहराए गए सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को उच्चतम न्यायालय ने कोली की क्यूरेटिव याचिका स्वीकार कर ली, जिसके बाद अब वह जेल से बाहर आ सकेंगे क्योंकि बाकी सभी मामलों में वह पहले ही बरी हो चुके हैं। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने दिया, जिसने कोली की याचिका पर खुले कोर्ट में सुनवाई की थी। 
अदालत ने कोली की सजा को रद्द करते हुए कहा कि अगर वह किसी और मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। यह फैसला उन परिवारों और कानूनी हलकों के लिए अहम है, जो पिछले 18 वर्षों से इस मामले पर नजर रखे हुए थे। 
जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा...
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि अभियोजन पक्ष सुरेंद्र कोली के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश नहीं कर पाया। अदालत ने माना कि जांच के दौरान कई गंभीर प्रक्रियागत खामियां रहीं, जिसके चलते दोषसिद्धि बरकरार नहीं रखी जा सकती। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को सिर्फ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर उम्रकैद या फांसी नहीं दी जा सकती, जब तक कि आरोप बिना किसी संदेह के साबित न हों। 
18 साल बाद मिला न्याय
कोली ने अपनी सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। अब अदालत ने उन्हें बरी करते हुए कहा कि न्याय का उद्देश्य सजा देना नहीं, बल्कि सच्चाई सामने लाना है। 
क्या है निठारी कांड
निठारी गांव में रहने वाले बच्चे वर्ष 2004 से लापता हो रहे थे। बच्चों के लापता होने की जानकारी उनके परिजन थाना सेक्टर-20 पुलिस से लेकर बड़े पुलिस अधिकारियों तक  से कर रहे थे। लेकिन पुलिस गुमशुदगी लिखने के बजाए उन्हें दुत्कार कर भगा देती थी। गायब होने वाले बच्चों में अधिकतर लड़कियां थीं। पायल नाम की एक युवती भी निठारी की पानी की टंकी के पास से लापता हो गई। उसके पिता सेक्टर-19 में रह रहे नंदलाल ने डी-5 सेक्टर-31 कोठी के मालिक व जेसीबी के बड़े डिस्ट्रीब्यूटर मोनिंदर सिंह पंधेर पर बेटी के अपहरण का शक जाहिर करते हुए पुलिस से शिकायत की।
पुलिस ने कार्रवाई के बजाय नंदलाल को ही बेटी से देह व्यापार करने का आरोप लगाते हुए भगा दिया। इसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने मामले की रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश देकर सीओ स्तर के अधिकारी को प्रगति आख्या के साथ कोर्ट में बुलाया। इसके बाद उसी साल 15 दिसंबर को अधिकारियों ने कोठी मालिक मोनिंदर सिंह व नौकर सुरेन्द्र कोली से पूछताछ की लेकिन रात में ही दबाव के चलते उन्हें छोड़ दिया।
-Legend news

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