पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में एक बार फिर खून बहा है। रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई है, जिससे छह लोगों की मौत हुई है। रावलकोट के नए बस टर्मिनल के पास मंगलवार को हिंसक झड़पें हुई हैं। बलूच सुधोनति में भी सुरक्षाबलों और आम लोगों के बीच टकराव हुआ है। बलूच सुधोनति और रावलकोट में जाहिद, जफर, अर्सलान अकबर और वाजिद नाम के लोगों की मौत की खबर है।
रालवकोट और आसपास ताजा हिंसा ने तनाव और बढ़ा दिया है। पीओके के बड़े हिस्से में लोग पहले ही इस्लामाबाद की सरकार पाकिस्तानी सेना के खिलाफ सड़कों पर हैं। पीओके के कई शहर हिंसा की चपेट में हैं। खासतौर से रावलकोट में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं और सेना को स्थानीय लोग चुनौती पेश कर रहे हैं। 
पीओके में बढ़ रहा गुस्सा
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। एक महीने से पाकिस्तानी सेना और सरकार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन व्यापक रूप ले रहे हैं। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे नेता सीधेतौर पर शहबाज शरीफ और असीम मुनीर को चुनौती दे रहे हैं। इससे घबराई पाकिस्तान सरकार लोगों पर गोलियां चलवा रही है।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में करीब एक महीने से जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन चल रहा है। पाकिस्तान सुरक्षाबलों के विरोध को दबाने की कोशिश ने तनाव को और ज्यादा बढ़ा दिया है। पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की कार्रवाईयों से लोगों का गुस्सा भड़कता जा रहा है। 
हालात और बिगड़ सकते हैं
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मंहगाई और विधानसभा की शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों के मुद्दे पर बीते महीने प्रदर्शन शुरू हुए थे। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना के दमन ने चीजों को बदतर कर दिया है। पाकिस्तानी सेना और सरकार के दमन के खिलाफ ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में आंदोलन बड़ा रूप ले चुका है।
पीओके के प्रदर्शनकारियों ने 27 जुलाई को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले अपनी 38-सूत्रीय आर्थिक और संवैधानिक मांगों को पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है। दूसरी ओर सरकार ने भारी हथियारों से लैस हजारों अतिरिक्त संघीय सुरक्षा बलों को उतारने का फैसला लिया है। इससे हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। 
भारत ने पाकिस्तान सरकार पर उठाए सवाल
विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान में पीओके में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर कहा है कि ये झड़पें 'व्यवस्थित शोषण' का नतीजा हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि PoK में चल रहे विरोध-प्रदर्शन, पाकिस्तान के अपने अवैध और जबरन कब्जे वाले इलाकों में दशकों से किए जा रहे व्यवस्थित शोषण, बुनियादी अधिकारों से वंचित रखने और प्रशासनिक दमन का सीधा नतीजा हैं।
विदेश मंत्रालय ने जरूरी सामान की सप्लाई रोकने, पुलिस की बर्बरता और इंटरनेट बंद करने के लिए पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि लोगों की जायज शिकायतों को दूर करने के बजाय पाकिस्तानी सरकार ने बेहद बर्बर पुलिस कार्रवाई की है। इसमें बेबस महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा, भोजन और दवा की सप्लाई रोकनाऔर निहत्थे नागरिकों पर गोलीबारी शामिल है, जिसके कारण दुखद मौतें हुई हैं। 
-Legend News

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