मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय और गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी वृंदावन के मध्य एक महत्वपूर्ण एमओयू हुआ। संस्कृति विश्वविद्यालय की ओर से रजिस्ट्रार मनीष मिश्रा और गीता शोध संस्थान के निदेशक दिनेश खन्ना ने इस समझौता पत्र(एमओयू) को अपने हस्ताक्षर कर अंतिम रूप दिया।
इस समझौते के अनुसार गीता शोध संस्थान की ओर से ब्रज संस्कृति, रासलीला तथा गीता के पठन-पाठन पर संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा। भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुरूप भविष्य में रासलीला के मंचन एवं नाट्य प्रस्तुतियों हेतु संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। गीता पर होने वाले शोध कार्य, शोध प्रबंध (थीसिस) तथा अकादमिक परियोजनाएँ दोनों संस्थानों द्वारा संयुक्त रूप से संचालित की जाएँगी। दोनों संस्थानों के बीच शिक्षण- प्रशिक्षण, शिक्षकों का आदान-प्रदान तथा अकादमिक विशेषज्ञता का परस्पर सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। ब्रज की संस्कृति, कला एवं पारंपरिक विधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु दोनों संस्थान मिलकर संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्र–छात्राओं का गीता शोध संस्थान में शैक्षिक भ्रमण कराया जाएगा। वे यहाँ आयोजित गोष्ठियों, व्याख्यानों एवं अन्य कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इसी प्रकार संस्कृति विश्वविद्यालय के प्राध्यापक एवं विद्वान भी गीता शोध संस्थान वृंदावन में गतिविधियों में सहभागिता करेंगे।
इस समझौते पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता और गीता शोध संस्थान के निदेशक दिनेश खन्ना ने कहा कि यह समझौता ब्रज की संस्कृति, कला और परंपराओं के संरक्षण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। समझौते के दौरान संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता, कुलपति प्रो. एमबी चेट्टी, ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डा उमेश चन्द्र शर्मा जी, संस्थान के कोऑर्डिनेटर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार और  गीता प्रचारक महेश चंद्र शर्मा, ब्रज कला केंद्र के विष्णु गोयल भी उपस्थित रहे।  
-Legend News

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