रिपोर्ट : LegendNews
मॉर्गन स्टेनली की नई रिपोर्ट: और तेज होने वाली है भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार
एक नई रिपोर्ट के अनुसार भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार आने वाले समय में तेज़ होने वाली है। यह तेजी रिज़र्व बैंक और सरकार द्वारा किए जा रहे सुधारों के कारण आएगी। यह रिपोर्ट वैश्विक वित्तीय संस्था मॉर्गन स्टेनली ने जारी की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्याज दरों में कटौती, बैंकों से जुड़े नियमों में ढील, बाजार में नकदी बढ़ाने के कदम, लगातार पूंजीगत खर्च, कर में राहत और अपेक्षाकृत प्रोत्साहन देने वाला बजट — ये सभी मिलकर भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति दे रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना काल के बाद जो सख्त आर्थिक व्यवस्था बनी थी, अब वह धीरे-धीरे ढीली पड़ रही है। इसके साथ ही व्यापार समझौते और चीन के साथ रिश्तों में नरमी भी सकारात्मक माहौल बना रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय शेयर बाजार में इस समय एक दुर्लभ स्थिति देखने को मिल रही है —
शेयरों का मूल्यांकन तुलनात्मक रूप से सस्ता है
हाल के समय में प्रदर्शन कमजोर रहा है
नीतिगत समर्थन मजबूत है
विकास का नया चक्र शुरू हो रहा है
रुपया कमज़ोर लेकिन स्थिर है
विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी कम है
और आने वाले समय में शेयर बायबैक बढ़ सकते हैं
रिपोर्ट के अनुसार कर व्यवस्था में सुधार और शेयर बाजार में सीमित नई हिस्सेदारी आने के कारण कंपनियां बायबैक की ओर अधिक झुक सकती हैं।
तेल पर निर्भरता कम होने, निर्यात—खासतौर पर सेवा क्षेत्र—की हिस्सेदारी बढ़ने और वित्तीय अनुशासन के कारण बचत और निवेश के बीच असंतुलन घटा है। इससे ब्याज दरें लंबे समय तक कम रहने की संभावना बनती है।
इसके साथ ही आपूर्ति से जुड़े सुधारों और महंगाई को लक्ष्य में रखने की नीति के कारण महंगाई में उतार-चढ़ाव कम हुआ है। इसका असर यह होगा कि आने वाले वर्षों में ब्याज दरों और विकास दरों में अस्थिरता घटेगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तेज़ विकास, कम उतार-चढ़ाव और घटती ब्याज दरें शेयरों के मूल्यांकन को सहारा देती हैं। इससे घरेलू परिवारों की बचत का रुझान इक्विटी निवेश की ओर बढ़ रहा है।
संस्था का कहना है कि वह आम सहमति से आगे है और आने वाले समय में कंपनियों की आय के अनुमान बेहतर होने की उम्मीद करती है। इसके अलावा, रिज़र्व बैंक की नीति से नकदी और कर्ज़ वृद्धि को समर्थन मिलने की संभावना है। निजीकरण जैसे कई कदम भी आगे बढ़ सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की हिस्सेदारी अभी निचले स्तर पर है। आगे निवेश तभी बढ़ेगा जब या तो भारत की वृद्धि और तेज़ हो, या दुनिया के अन्य बाजारों में तेजी कम पड़े।
संस्था के अनुसार, यह दौर किसी एक आकार की कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बाजार से जुड़ा आर्थिक रुझान बन रहा है।
-Legend News

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