प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वीडियो हटाए जाने से जुड़े मामले को लेकर Meta के अधिकारी सरकार के सामने पेश हुए। इस दौरान बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को लेकर भी चिंता जताई गई। खबर है कि इस बार हुई मीटिंग में कंपनी के वैश्विक अधिकारी शामिल हुए थे। यह मुलाकात करीब 45 मिनट चली। अब तक साफ नहीं हो सका है कि मीटिंग में सरकार की तरफ से क्या निर्देश दिए गए हैं। 
मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोल काप्लान मीटिंग के लिए पहुंचे थे। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सचिव एस कृष्णन के साथ बैठक की थी। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार यह मीटिंग करीब 45 मिनट तक चली। इस दौरान अधिकारी ने वजहें बताईं कि क्यों पीएम मोदी का वीडियो प्लेटफॉर्म से हट गया था। 
मार्क जकरबर्ग से माफी की मांग
संसद की एक स्थायी समिति ने वीडियो हटाने को लेकर बुधवार को मेटा के प्रमुख मार्क जकरबर्ग को माफी मांगने के लिए तीन दिन का समय दिया और ऐसा नहीं होने पर उन्हें प्राप्त छूट वापस लेने को कहा। मंत्रालय के सचिव को लिखे पत्र में, लोकसभा सचिवालय के एक निदेशक ने कहा कि समिति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस वीडियो को फेसबुक से 5-6 घंटे तक हटाए जाने के मामले को बहुत गंभीरता से लिया है, जिसमें उन्होंने परीक्षा से जुड़े विवादों और प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बारे में छात्रों और जेन जी को संबोधित किया था। 
पीटीआई भाषा के अनुसार, ए ज्योतिर्मयी के हस्ताक्षर वाले पत्र में कहा गया है, 'विचार-विमर्श के दौरान समिति ने इस मामले पर मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग से माफी की मांग की। अगर वह यह पत्र मिलने के तीन दिन के भीतर बिना किसी शर्त के माफी नहीं मांगते हैं, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत उन्हें मिली सुरक्षा/छूट वापस ली जा सकती है और एक प्रकाशक के तौर पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।'
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने उन मंचों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है जिन पर बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री डाली जाती है और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक चीजें होती हैं।
पत्र में कहा गया है, 'अगर मध्यवर्ती मंच अपने पोर्टल से सीएएसएम सामग्री नहीं हटाते तो आईटी कानून की धारा 79 (3) के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।' 
Meta से नाराज सरकार
सोमवार को हुई बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा था कि यह पहली बार नहीं है जब मेटा ने कोई वीडियो हटाया है। उन्होंने आरोप लगाया, '2024 में मार्क जुकरबर्ग ने संसदीय चुनाव के नतीजों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उनकी सोच देश को अस्थिर करने की है।' दुबे ने दावा किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म गृह मंत्रालय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयों के निर्देशों को नहीं मानते हैं। 
-Legend News 

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