वैदिक नियमानुसार विवाह के समय चार फेरों का विधान है और ७ मुख्य वचनों की सप्तपदी होती है ।

ये फेरे चार पुरुषार्थो- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के प्रतीक हैं।

इनमें से पहले तीन फेरों में वधू आगे चलती है, जबकि चौथे फेरे में वर आगे होता है।

सप्तपदी के सात वचन

पहला वचन भोजन व्यवस्था के लिए,

दूसरा शक्ति संचय, आहार तथा संयम के लिए,

तीसरा धन की प्रबंध व्यवस्था हेतु,

चौथा आत्मिक सुख के लिए,

पांचवां पशुधन संपदा हेतु,

छठा सभी ऋतुओं में उचित रहन-सहन के लिए,

अंतिम 7वें पग में कन्या अपने पति का अनुगमन करते हुए सदैव साथ चलने का वचन लेती है तथा सहर्ष जीवनपर्यंत पति के प्रत्येक कार्य में सहयोग देने की प्रतिज्ञा करती है।

सात फेरे मुख्यत: बॉलीवुड की देन है. हाँ, मजेदार बात ये है कि रणवीर और दीपिका ने चार ही फेरे लिए! हम सबकी चहेती कथाकार शिवानी जी ने तो अहल्या के जीवन में चौदह फेरे भी लगवाये थे !

अब लगे हाथ मैं अपनी शादी की बात भी बताती चलूँ. हमारी शादी में हमारे मायके के पंडितजी ने चार फेरे ही करवाए. तब तो एक आध लोगों ने कहा कि पंडितजी, फेरे तो सात होने चाहिए तो उन्हें पंडितजी ने मुस्करा कर चुप करा दिया कि वेदानुसार चार ही फेरे होंगे. अब सब चुप हो गए. शास्त्रार्थ कौन करे. पर बाद में कभी कभी मेरे पति भी चुटकी ले लेते थे कि भई चार ही फेरे हुए, थोड़ा ध्यान देना पड़ेगा, बंधन कमजोर है…..

फिर हमने ध्यान से इस बारे में वैदिक गृहसूत्रों को पढ़ा तो पाया कि पंडितजी बिलकुल ठीक थे. किसी भी गृहसूत्र में अग्नि की सात प्रदक्षिणाएँ नहीं लिखी हैं - जहाँ भी फेरे या प्रदक्षिणा का उल्लेख है (जैसे कि पारस्कर गृहसूत्र ), वहां चार फेरे ही लिखे हैं.

- Legend News

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