आतंकवाद के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने शनिवार को एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 4 जुलाई 2026 को एक गजट अधिसूचना जारी कर 23 व्यक्तियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 के तहत 'डेजिग्नेटेड टेररिस्ट' (आतंकवादी) घोषित किया है। ये सभी आतंकी पाकिस्तान स्थित हैं और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) व लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े हैं।
आतंकियों पर क्या है आरोप?
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार ये आतंकी जम्मू-कश्मीर में युवाओं को बरगलाकर आतंकी गतिविधियों में शामिल करने, घुसपैठ कराने, हथियारों की ट्रेनिंग देने, ड्रोन के जरिए हथियार पहुंचाने और बड़े हमलों की साजिश रचने में संलिप्त रहे हैं। इन 23 आतंकियों में से 3 लश्कर संस्थापक हाफिज सईद के करीबी हैं। इसके अलावा, 2016 के नगरोटा आर्मी कैंप और 2018 के सुंजवान मिलिट्री स्टेशन हमले में शामिल आतंकी भी इस सूची में शामिल किए गए हैं।
डेजिग्नेटेड टेररिस्ट घोषित होने के बाद क्या होगा?
UAPA कानून के तहत आतंकी घोषित होने का मतलब है कि अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की शक्ति मिल गई है। इससे:
आतंकियों के वित्तीय स्रोतों पर रोक लगाई जाएगी।
हथियार खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगेगा।
उनकी सभी संपत्तियों को कुर्क (Seize) करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
वर्ष 2019 में कानून में संशोधन के बाद अब केंद्र सरकार सीधे तौर पर किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित कर सकती है। इसके साथ ही अब भारत में घोषित आतंकवादियों की कुल संख्या 80 हो गई है।
सूची में शामिल प्रमुख नाम
गृह मंत्रालय ने आतंकियों के नाम की विस्तृत सूची जारी की है:
जैश-ए-मोहम्मद (JeM): मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसद्दीक (डॉक्टर), मुफ्ती मोहम्मद असगर खान, हाफिज अब्दुल शकूर, अब्दुल्ला जिहादी, गुलाम फरीद, मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की और वसीम नूर जट।
लश्कर-ए-तैयबा (LeT): फिरदौस अहमद भट, हारून रशीद गनाई, बिलाल अहमद मीर, आबिद क्यूम लोन, नजीर अहमद गुर्जर, अब्दुल रऊफ, अशफाक अहमद, हाफिज खालिद वलीद, मौलाना सैफुल्ला खालिद, मोहम्मद याकूब, मौलाना यूसुफ तैबी, ओवैस फिरोज, कारी याकूब शेख, राणा इफ्तिखार और मोहम्मद शहीद फैसल (अल कायदा/ISIS से भी जुड़ा)।
डेजिग्नेटेड टेररिस्ट क्या है?
जब सरकार किसी व्यक्ति को आधिकारिक रूप से 'डेजिग्नेटेड टेररिस्ट' या 'आतंकवादी' घोषित करती है, तो इसका मतलब है कि सरकार के पास ऐसे पुख्ता सबूत या जानकारी है कि वह व्यक्ति आतंकवाद को बढ़ावा देने, उसे वित्तपोषित करने (फंडिंग), उसे अंजाम देने या उसमें भाग लेने जैसी गतिविधियों में लिप्त है।
पहले कानून के तहत केवल आतंकवादी संगठनों को ही प्रतिबंधित किया जाता था लेकिन 2019 में UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) में संशोधन के बाद सरकार को यह अधिकार मिल गया कि वह व्यक्तिगत तौर पर भी किसी को आतंकवादी घोषित कर सके।
ऐसा घोषित होने के बाद क्या प्रभाव पड़ता है?
किसी व्यक्ति को इस सूची में शामिल करने का मुख्य उद्देश्य उसे दुनिया भर में अलग-थलग करना और उसकी गतिविधियों को रोकना है:
वित्तीय घेराबंदी: सरकार ऐसे व्यक्ति के बैंक खातों और उसकी सभी प्रकार की संपत्तियों को कुर्क (Seize) कर सकती है या उन्हें फ्रीज कर सकती है, जिससे उसकी फंडिंग का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है।
यात्रा पर प्रतिबंध: ऐसे व्यक्तियों के पासपोर्ट रद्द कर दिए जाते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके आवागमन पर कड़ी नजर रखी जाती है।
हथियारों पर रोक: सरकार यह सुनिश्चित करती है कि ऐसे व्यक्ति को किसी भी तरह के हथियार न मिल सकें।
अंतर्राष्ट्रीय दबाव: जब भारत किसी को 'डेजिग्नेटेड टेररिस्ट' घोषित करता है, तो यह वैश्विक मंचों (जैसे संयुक्त राष्ट्र) पर भी एक मजबूत प्रमाण के रूप में काम करता है, जिससे अन्य देशों को भी उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
यह किस कानून के तहत आता है?
भारत में यह UAPA (Unlawful Activities Prevention Act, 1967) के तहत किया जाता है। जब गृह मंत्रालय (MHA) को किसी व्यक्ति की गतिविधियों पर संदेह होता है, तो वह गजट नोटिफिकेशन जारी कर उस व्यक्ति का नाम इस 'आतंकवादियों की सूची' में डाल देता है।
आतंकवाद के प्रति भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति
भारत ने आतंकवाद के इकोसिस्टम को पूरी तरह नष्ट करने का संकल्प लिया है। इस वर्ष सरकार ने अपनी पहली व्यापक 'नेशनल काउंटर टेररिज्म पॉलिसी एंड स्ट्रेटेजी' भी पेश की है, जिसे 'प्रहार' (PRAHAAR) नाम दिया गया है। यह नई सुरक्षा नीति आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख को दर्शाती है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार सीमा पार से ड्रोन के जरिए फैलाई जा रही गतिविधियों और ऑनलाइन भर्ती चैनलों पर नजर बनाए हुए हैं। 
-Legend News

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