पाकिस्तान में इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद 9 मई को हिंसा हुई थी। इमरान समर्थकों ने अपने हमले से पाकिस्तानी सेना को हिला कर रख दिया था। इस हिंसा में सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला हुआ था। हमले को रोकने में नाकाम रहने के कारण अब पाकिस्तानी सेना ने अपने बड़े अफसरों पर ऐक्शन लिया है। एक लेफ्टिनेंट जनरल, 3 मेजर जनरल और 7 ब्रिगेडियर की सेवा बर्खास्त कर दी गई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता (DGISPR) मेजर जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने इस कार्रवाई की पुष्टि की।
इमरान समर्थकों के हमले से सैन्य प्रतिष्ठानों को न बचा पाने के कारण यह कार्रवाई की गई है। पाकिस्तानी सेना के डीजी आईएसपीआर ने रावलपिंडी में इससे जुड़ी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि 9 मई की हिंसा में देश के अलग-अलग हिस्सों में शहीद स्मारकों का अपमान किया गया। उन्होंने कहा, '9 मई की हिंसा ने साफ कर दिया कि जो पाकिस्तान का दुश्मन नहीं कर सका वह इन दंगाइयों ने कर दिया। 9 मई की हिंसा निंदनीय है और पाकिस्तान के इतिहास का काला अध्याय है। यह पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी साजिश का नतीजा है।' 
कई महीने पहले हुई प्लानिंग
9 मई की हिंसा पर आगे बोलते हुए डीजीआईएसपीआर ने कहा कि इससे जुड़े सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं। हिंसा की जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि शहीदों के परिवार वाले सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर दोषियों को न्याय के कटघरे में कब खड़ा किया जाएगा? सेना के लोग पूछ रहे हैं अगर शहीद स्मारकों का इस तरह अपमान होता है, तो उन्हें अपना बलिदान क्यों देना चाहिए। इसके साथ ही DGISPR ने यह भी दावा किया कि इस हमले की प्लानिंग कई महीने पहले की गई थी।
इमरान की गिरफ्तारी के बाद हुई थी हिंसा
इस्लामाबाद हाईकोर्ट में 9 मई को जब इमरान खान पेशी के लिए पहुंचे थे तब अर्धसैनिक बल के जवानों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इस वजह से पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क गई थी। 20 से ज्यादा मिलिट्री और सरकारी बिल्डिंग पर हमला हुआ था। इमरान समर्थकों ने रावलपिंडी में मिलिट्री हेडक्वार्टर में तोड़फोड़ और आगजनी की। 10 हजार से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। इस हिंसा के बाद पाकिस्तानी सेना ने कहा था कि दोषियों पर आर्मी एक्ट में मुकदमा चलेगा। 
Compiled: Legend News

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