वाराणसी। काशी में महाशिवरात्रि की तैयारियां जोरों पर हैं. श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के साथ प्रशासनिक अधिकारियों ने बैठक करके तैयारियों को अंतिम रूप दिया है. 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व के लिए श्रीवैष्णो धाम श्राइन बोर्ड ने विशेष उपहार भेजा है. वहीं, मां गौरा का श्रृंगार असम से विशेष तौर से आए वस्त्रादि से किया जाएगा. महाशिवरात्रि पर भक्तों को अनवरत 45 घंटे बाबा विश्वनाथ के दर्शन होंगे.

यह सामान प्रतिबंधित रहेंगे
महाशिवरात्रि पर मंदिर में प्रवेश करते समय बड़े बैग, मोबाइल फोन, स्मार्टफोन, डिजिटल घड़ी, पेन, तंबाकू, पॉलीथीन बैग, प्लास्टिक की वस्तुएं प्रतिबंधित रहेंगी. दर्शनार्थियों से अपील की गई है कि अन्य निषिद्ध सामग्री अपने साथ न लाएं या इन्हें अपने स्थान पर ही छोड़कर ही आएं. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धाम परिसर में शुद्ध पेयजल, ग्लूकोज, ओआरएस, गुड़ और मेडिकल हेल्प डेस्क की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी.

बैठक के बाद मंडलायुक्त ने धाम परिसर का निरीक्षण कर तैयारियों का स्थलीय जायजा लिया. सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए. श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों से अपील की गई है कि वह खाली पेट धाम में दर्शन के लिए न आएं.

प्रतिबंधित वस्तुएं अपने साथ न लाएं. श्रीकाशी विश्वनाथ धाम श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुव्यवस्थित दर्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है. विशेष दर्शन या स्पर्श दर्शन के लिए अनुरोध न करें, क्योंकि महाशिवरात्रि के अवसर पर इसे पूर्ण किया जाना संभव नहीं होगा.

दर्शन की टाइमिंग
काशीवासियों के लिए प्रातः 04:00 बजे से 05:00 बजे तक के दर्शन नियम के संबंध में संबंधित पक्षों से बैठक कर व्यवस्था निर्धारित की जाएगी. इससे उन्हें सुगमता से दर्शन कराया जा सके. महाशिवरात्रि के अवसर पर मंगला आरती का समय परिवर्तित रहेगा.

मंगला आरती प्रातः 02:15 बजे से 03:15 बजे तक संपन्न होगी. इसके बाद गर्भ गृह की सफाई होगी. फिर सामान्य दर्शन प्रारंभ होंगे, जो लगातार 45 घंटे तक चलेंगे. 16 फरवरी 2026 को रात्रि 11:00 बजे मंदिर बंद किया जाएगा. तब तक महाशिवरात्रि के दर्शन निरंतर चलते रहेंगे.

शिव-विवाह की तैयारियां
काशी में शिव-विवाह की सदियों पुरानी परंपराओं को लेकर तैयारियां की जा रही हैं. टेढ़ीनीम स्थित विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर बाबा विश्वनाथ की हल्दी, शिव-विवाह, शिव बारात और गौना की रस्मों को लेकर माहौल भक्तिमय हो उठा है.

इस वर्ष महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ और माता गौरा का श्रृंगार विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहेगा, क्योंकि पहली बार शिव-गौरा की चल प्रतिमा असमिया पारंपरिक परिधान और आभूषणों में सजेगी.

शिवसागर से आया असमिया श्रृंगार 
विश्वनाथ मंदिर के महंत वाचस्पति तिवारी ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ और माता गौरा को जो परिधान धारण कराए जाएंगे, वह असम के ऐतिहासिक नगर शिवसागर से विशेष रूप से मंगाए गए हैं.

यह श्रृंगार न केवल परिधान की दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक संदेश के रूप में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. इसके माध्यम से काशी और असम की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं का सुंदर संगम देखने को मिलेगा.

‘चेलेंग–गसोमा’ में सजेंगे महादेव 
महंत वाचस्पति तिवारी के अनुसार, बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा को असमिया पुरुष परिधान ‘चेलेंग और गसोमा’ धारण कराया जाएगा. इस परिधान में बाबा का स्वरूप अत्यंत राजसी और दिव्य दिखाई देगा, जो शिव-विवाह की गरिमा को और भी भव्य बनाएगा.

दुल्हन के रूप में माता गौरा 
माता गौरा का श्रृंगार इस बार विशेष रूप से मनमोहक होगा. उन्हें लाल और सुनहरे रंग की रेशमी ‘मेखेला साड़ी’ पहनाई जाएगी, जो असम की पारंपरिक स्त्री पोशाक है.

इसके साथ माता गौरा असमिया पारंपरिक आभूषणों से अलंकृत होंगी. इनमें जूनबीरी (अर्धचंद्राकार हार), गुमखारू (पारंपरिक कंगन), थुरिया (मांगटीका) शामिल हैं. इन आभूषणों के साथ माता गौरा का स्वरूप एक नववधू के रूप में अत्यंत अलौकिक दिखाई देगा.

काशी की कलाकार कर रहीं श्रृंगार
यह संपूर्ण श्रृंगार टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर ही काशी की सांस्कृतिक कलाकार आकांक्षा गुप्ता द्वारा किया जा रहा है. आकांक्षा गुप्ता लोक कल्याण और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ माता गौरा का स्वरूप धारण कर उन्हें तैयार कर रही हैं.

शिव बारात में काशी की हस्तकला की झलक
महंत आवास के आयोजन समिति के संयोजक संजीव रत्न मिश्र ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि पर निकलने वाली ऐतिहासिक शिव बारात में भी एक नया आकर्षण जोड़ा गया है.

काशीवासियों की ओर से शिव बारात में शामिल प्रतिकात्मक बाबा विश्वनाथ की प्रतिमा को काशी में ही बने मलमल और जरी से तैयार राजसी परिधान धारण कराए जाएंगे. उन्होंने बताया कि काशी की पारंपरिक बुनाई और कारीगरी को शिव बारात के माध्यम से प्रस्तुत करने का यह एक प्रयास है.

हल्दी से रंगभरी एकादशी तक उत्सव
महंत वाचस्पति तिवारी ने बताया कि महाशिवरात्रि से पहले 13 फरवरी को बाबा की हल्दी की रस्म होगी. इसके बाद महाशिवरात्रि पर शिव-विवाह संपन्न होगा.

महाशिवरात्रि के बाद टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास गौरा-सदनिका में परिवर्तित हो जाता है. यहीं से अमलका (रंगभरी) एकादशी के दिन माता गौरा की गौना पालकी यात्रा निकाली जाती है.

परंपरा के अनुसार, काशीवासी रजत पालकी में बाबा विश्वनाथ और माता गौरा को विराजमान कर विश्वनाथ मंदिर तक ले जाते हैं. वहां बाबा से होली खेलने की अनुमति मांगी जाती है, जिसके साथ काशी में फागोत्सव की शुरुआत होती है.

वैष्णो देवी से आया उपहार
वाराणसी में विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट की तरफ से अलग-अलग देवालयों को भेजे जा रहे विशेष उपहार के बाद पहली बार माता वैष्णो देवी की तरफ से बाबा विश्वनाथ को विशेष उपहार शिवरात्रि से पहले भेजा गया है.

मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व पर श्रीमाता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड से श्री काशी विश्वनाथ महादेव को उपहार का नवाचार शुरू हुआ है.

महाशिवरात्रि के दिव्य पर्व पर श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में सनातन परंपरा को समृद्ध करने वाला यह कार्य बाबा के धाम में भक्तों के लिए और भी दिव्य और भव्य हो जाता है.

इस वर्ष महाशिवरात्रि पर्व के नवाचार में अनेक प्रसिद्ध देवालयों एवं देवी देवताओं द्वारा भगवान विश्वनाथ के इस महापर्व पर शुभेच्छा पूर्वक उपहार प्रेषित किए जाने का विहंगम प्रयोग है.

इसी श्रृंखला में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की ओर से भगवान श्री विश्वेश्वर (श्री काशी विश्वनाथ महादेव) के लिए उपहार एवं प्रसाद श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास कार्यालय में प्राप्त हुआ.

इस भेंट में माता श्रृंगार गौरी के लिए विशेष चुनरी बाबा विश्वनाथ के लिए वस्त्र, वहां के विशेष सिक्के, साइन बोर्ड की विशेष डायरी और माता वैष्णो देवी की तस्वीर के साथ अन्य उपहार शामिल हैं.

उन्होंने बताया कि विश्वनाथ मंदिर न्यास की तरफ से इस तरह के नवाचार की शुरुआत पहले ही की गई है. हर पावन पर्व पर माता विशालाक्षी, वैष्णो देवी सहित कृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा वृंदावन के लिए विशेष उपहार बाबा विश्वनाथ की तरफ से भेजे गए थे.

यह पहला मौका है कि शिवरात्रि से पहले अलग-अलग जगह से उपहार स्वरूप चीज प्राप्त हो रही हैं. शिवरात्रि के मौके पर पहले ही मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि की तरफ से विश्वनाथ जी के लिए विशेष वस्त्र भेजे जाने की बात कही गई है.

इसके अलावा सिद्धिविनायक मंदिर से भी बाबा विश्वनाथ के लिए उपहार आ रहा है. इन सब के बीच दक्षिण भारत के कई मंदिरों की तरफ से भी शिवरात्रि पर उपहार स्वरूप बाबा विश्वनाथ को कई चीज भेजी जा रही हैं, जो अपने आप में सभी मंदिरों के एकजुट होकर आयोजनों को और भी शक्ति प्रदान कर रहा है.
- Legend News
 

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