रिपोर्ट : LegendNews
लोन फ्रॉड मामला: वडोदरा-मुंबई में ED की छापेमारी, ₹12.20 करोड़ की ज्वेलरी जब्त
नई दिल्ली। वडोदरा: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बिलपावर लिमिटेड (Bilpower Limited) से जुड़े 160.55 करोड़ रुपये के कथित लोन फ्रॉड मामले में वडोदरा और मुंबई में बड़ी कार्रवाई की है. ED ने सात रिहायशी और कमर्शियल जगहों और तीन बैंक लॉकर्स की तलाशी ली. इस कार्रवाई के दौरान, लगभग 43.90 लाख रुपये नकद और 12.20 करोड़ रुपये कीमत के गहने जब्त किए गए हैं.
इस मामले में, लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) के कथित गलत इस्तेमाल और शेल कंपनियों के जरिये बैंक के पैसे को दूसरी जगह लगाने (डायवर्जन) के आरोप अहम हो गए हैं.
बिलपावर लिमिटेड से जुड़े कथित लोन फ्रॉड मामले में ईडी की कार्रवाई के बाद, यह पूरा मामला फिर से चर्चा में आ गया है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शिकायत पर CBI द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की है.
ईडी की जांच के अनुसार, बिलपावर लिमिटेड ने SBI से कई तरह के लोन और बैंकिंग सुविधाएं ली थीं. इनमें कैश क्रेडिट, वर्किंग कैपिटल टर्म लोन, फंडेड इंटरेस्ट टर्म लोन और कॉर्पोरेट लोन जैसी सुविधाएं, साथ ही बैंक गारंटी और लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) जैसी नॉन-फंड आधारित सुविधाएं शामिल थीं.
इस पूरे मामले में लेटर ऑफ क्रेडिट का मुद्दा अहम है. लेटर ऑफ क्रेडिट बैंक द्वारा दी जाने वाली एक वित्तीय सुविधा है, जिसके आधार पर किसी व्यापारिक लेन-देन में तय शर्तों के तहत पेमेंट की गारंटी दी जाती है. ED के अनुसार, बिलपावर लिमिटेड के मामले में आरोप है कि कुछ शेल और फर्जी कंपनियों के पक्ष में LC डिवॉल्व (devolved) हुई थीं. यहां 'LC डिवॉल्व' होने का मतलब है कि LC के तहत पेमेंट की जिम्मेदारी बैंक पर आ गई और संबंधित पार्टी को वह रकम चुकाने की स्थिति पैदा हो गई. ED का आरोप है कि इन लेन-देन में कथित तौर पर जाली दस्तावेज पेश किए गए और उन्हें असली दस्तावेजों के तौर पर इस्तेमाल किया गया.
जांच इस दिशा में भी हो रही है कि कैसे बैंक का पैसा कथित तौर पर ऐसे लेनदेन के जरिये शेल या फर्जी कंपनियों में भेजा गया और बाद में यह पैसा कहां पहुंचा. ED के अनुसार, आरोप है कि यह पैसा आगे चौधरी परिवार के सदस्यों या उनके सहयोगियों द्वारा नियंत्रित अलग-अलग संस्थाओं में भेजा गया. इसलिए, इस मामले में यह सिर्फ आम बैंक लोन का मुद्दा नहीं है, बल्कि लोन, LC, शेल कंपनियों, कथित फर्जी दस्तावेजों और पैसे के हेरफेर के बीच का संबंध जांच का एक अहम हिस्सा बन गया है.
ED की जांच के अनुसार, बिलपावर लिमिटेड ट्रांसफॉर्मर लैमिनेशन और कोर बनाने वाली कंपनी है. जांच से पता चला है कि कंपनी का प्रबंधन राजेंद्र कुमार चौधरी, सुरेश कुमार चौधरी और नरेश कुमार चौधरी करते हैं.
कंपनी के SBI के साथ लंबे समय से बैंकिंग ट्रांजैक्शन भी थे. कंपनी का लोन अकाउंट NPA होने के बाद, एक बड़ी रकम बकाया रह गई थी और अब ED इन वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है. तलाशी के दौरान, ED को भारी मात्रा में कैश और गहने भी मिले हैं. लगभग 43.90 लाख रुपये कैश और 12.20 करोड़ रुपये कीमत के गहने जब्त किए गए हैं. इसके अलावा, PMLA के तहत दो बैंक अकाउंट में मौजूद लगभग 27 लाख रुपये की रकम फ्रीज कर दी गई है. तीन बैंक लॉकर भी फ्रीज किए गए हैं.
सूत्रों के मुताबिक, लाशी के दौरान अचल संपत्ति, जमीन और मशीनरी से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं. इसके अलावा, ED ने अकाउंट बुक, लेजर, अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए हैं.
अब ED इन दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों के आधार पर कथित वित्तीय लेन-देन की आगे जांच कर रही है. खासकर बैंक से पैसे का बाहर जाना, शेल कंपनियों के साथ लेन-देन और LC से जुड़े दस्तावेजों से पूरे कथित वित्तीय नेटवर्क के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है. इस मामले में जांच अभी चल रही है और ED कथित लोन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े वित्तीय लेन-देन की आगे जांच कर रही है.
- Legend News

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