श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को कहा कि कलम की ताकत से बड़ी कोई शक्ति नहीं होती। समाज और राष्ट्र के निर्माण में पुस्तकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से पुस्तकों को जीवनभर का साथी बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि चिनार बुक फेस्टिवल अब केवल पुस्तक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि ज्ञान, विचार, रचनात्मकता और युवा सशक्तीकरण का राष्ट्रीय मंच बन चुका है।

 श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में तीसरे चिनार बुक फेस्टिवल का उद्घाटन करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि एक अच्छी पुस्तक व्यक्ति को सोचने, आत्ममंथन करने और बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देती है।

इसलिए किताबों को कभी बोझ नहीं, बल्कि जीवन का सबसे विश्वसनीय साथी समझना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से हर महीने कम से कम एक पुस्तक पढ़ने और लेखन में रुचि रखने वाले युवाओं से नियमित लेखन का अभ्यास करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि किसी भी पुस्तक मेले की सफलता का आकलन पुस्तकों की बिक्री से नहीं, बल्कि वहां से निकलने वाले नए विचारों, सार्थक संवाद और समाज में पैदा होने वाली जागरूकता से होना चाहिए। यदि यह आयोजन किसी एक युवा के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सके तो इसका उद्देश्य पूरा माना जाएगा।

मनोज सिन्हा ने कहा कि चिनार केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि कश्मीर की विरासत, संस्कृति और पहचान का प्रतीक है। उसी भावना के साथ चिनार बुक फेस्टिवल भी जम्मू-कश्मीर को शिक्षा, साहित्य और बौद्धिक विमर्श के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इस पहल को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए नेशनल बुक ट्रस्ट, लेखकों, प्रकाशकों और आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों की सराहना की।

अब सिर्फ प्रदर्शनी नहीं, राष्ट्रीय मंच बना चिनार बुक फेस्टिवल
उपराज्यपाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में शांति, विश्वास और सकारात्मक सोच का वातावरण मजबूत हुआ है। युवाओं की ऊर्जा अब शिक्षा, नवाचार और रचनात्मक गतिविधियों की ओर बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रमों में जम्मू-कश्मीर लगातार देश के अग्रणी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल रहा। किश्तवाड़ और पुंछ सहित कई जिलों के राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन को उन्होंने इस सकारात्मक बदलाव का प्रमाण बताया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बहुभाषी शिक्षा और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हिंदी, उर्दू, कश्मीरी, डोगरी, गोजरी और अंग्रेजी सहित विभिन्न भाषाओं की पुस्तकें युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ व्यापक दृष्टिकोण भी प्रदान करती हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि चिनार बुक फेस्टिवल भविष्य में पुस्तकालयों, बुक क्लबों और साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से पूरे वर्ष चलने वाला अभियान बनेगा। इससे जम्मू-कश्मीर को ज्ञान, संस्कृति और रचनात्मकता के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में नई पहचान मिलेगी। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने बाबा अमरनाथ से श्री अमरनाथ यात्रा की निर्विघ्न और सफल संपन्नता की प्रार्थना की।
- Legend News

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