प्रधानमंत्री आवास की ओर किसी भी प्रस्तावित मार्च को रोकने और उच्च सुरक्षा वाले इलाकों में प्रदर्शन के लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग को लेकर देशभर के सैकड़ों वकीलों ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा है। वकीलों ने ज्ञापन में कहा है कि प्रधानमंत्री आवास देश के सबसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले प्रतिष्ठानों में से एक है। ऐसे में यहां राजनीतिक प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने दिल्ली पुलिस से मांग की है कि पीएम आवास जैसे हाई-सिक्योरिटी जोन में राजनीतिक प्रदर्शन के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाए।
केजरीवाल के आह्वान और 20 जुलाई की घटना का जिक्र
यह ज्ञापन एडवोकेट संकेत गुप्ता के माध्यम से भेजा गया है। ज्ञापन में अरविंद केजरीवाल द्वारा प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च के आह्वान का भी उल्लेख किया गया है। वकीलों का कहना है कि 20 जुलाई को बिना अनुमति के हुए धरने जैसी घटनाएं दोबारा न हों, इसे रोकना जरूरी है। उन्होंने आशंका जताई है कि अगर राजनीतिक दल या संगठन हाई-सिक्योरिटी क्षेत्रों की ओर जुटान करते हैं तो इससे सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
संविधान और सुरक्षा कानूनों का हवाला
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को उससे ऊपर रखना आवश्यक है। इसी आधार पर मांग की गई है कि प्रधानमंत्री आवास के आसपास किसी भी तरह की अवैध सभा, जुलूस या प्रदर्शन की अनुमति न दी जाए। वकीलों ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और एसपीजी अधिनियम के प्रावधानों का भी जिक्र किया है तथा कहा है कि इन कानूनों के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही दिल्ली पुलिस से अपील की गई है कि वह सभी हाई-सिक्योरिटी प्रतिष्ठानों के आसपास प्रदर्शन को लेकर एक समान और व्यापक एसओपी जारी करे।
स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग
वकीलों ने कहा है कि भविष्य में अगर कोई राजनीतिक दल या संगठन हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र की ओर मार्च का सार्वजनिक आह्वान करता है तो उस पर रोक के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश पहले से तय होने चाहिए। ज्ञापन को अत्यंत जरूरी बताते हुए उन्होंने दिल्ली पुलिस से इस मामले में तत्काल निवारक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। 
-Legend News

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