कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार गुरुवार को राज्य चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने SIR में गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि फॉर्म 7 के दुरुपयोग में शामिल लोगों के खिलाफ जब तक रिपोर्ट दर्ज नहीं होगी, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे।
उनका कहना है कि SIR में गड़बड़ियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। इससे पहले उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि 45 लाख से ज्यादा वोटरों के नामों में गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसमें भाजपा के लोग शामिल हैं।
राज्य सरकारें या उनकी पुलिस चुनाव आयुक्तों पर उनके सरकारी काम को लेकर सीधे केस दर्ज नहीं कर सकती हैं। 
दावा: पहले से भरे हुए फॉर्म-7 जमा किए गए
शिवकुमार ने बताया कि विजयपुरा, भालकी, बेलगावी, मैसूरु, मुदिगेरे और बेंगलुरु समेत कई विधानसभा क्षेत्रों में लोगों को पहले से भरे हुए फॉर्म-7 दिए गए।
इन फॉर्म में वोटरों के नाम, पते और EPIC नंबर पहले से दर्ज थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 70% से ज्यादा बूथों में BJP और पार्टी से जुड़े नेताओं ने फॉर्म-7 लिए हैं।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कुछ लोगों ने दर्जनों और कुछ ने सैकड़ों आवेदन जमा किए। उन्होंने 84, 92, 241 और 423 फॉर्म जमा करने वाले लोगों के उदाहरण दिए।
उन्होंने कहा कि इन आवेदनों का इस्तेमाल अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों, दलितों, अनुसूचित जातियों और आदिवासी वोटरों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। 
भालकी में एक दिन में 3,244 आवेदन
कर्नाटक सरकार में मंत्री ईश्वर खंड्रे के मुताबिक भालकी में 36 लोगों ने एक ही दिन में फॉर्म-7 के 3,244 आवेदन जमा किए। उन्होंने इन लोगों को BJP कार्यकर्ता बताया।
खंड्रे ने ऐसे व्यक्ति का उदाहरण दिया, जिसने 241 आवेदन जमा किए थे। उन्होंने कहा कि जिन वोटरों के नाम इन आवेदनों में शामिल थे, वे बाद में पुलिस के पास पहुंचे।
इन वोटरों ने आरोप लगाया कि उनके नाम हटाने की कोशिश में गलत जानकारी और जालसाजी का इस्तेमाल किया गया। 
-Legend News

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