भारत ने शुक्रवार को सिंधु जल संधि पर रोक के अपने स्टैंड को जैसे ही दोहराया, जाने-माने जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय कानून क्या कहता है और पाकिस्तान ने कैसे संधि की मूल भावना का उल्लंघन करके भारत को इस तरह के स्टैंड पर बने रहने को मजबूर कर दिया है। इसके लिए उन्होंने लैटिन शब्द पैक्टा संट सर्वंदा (Pacta Sunt Servanda) का हवाला दिया है। 
सद्भावना, सहयोग और भरोसे पर आधारित संधि 
भारत ने आधिकारिक तौर पर फिर से साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि पर भारत की स्थिति अटल है। पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद को रोके जाने तक सिंधु जल संधि रुकी रहेगी। इसपर अपनी प्रतिक्रिया में ब्रह्मा चेलानी ने एक्स के माध्यम से कहा है, 'सिंधु जल संधि 6 नदियों वाले सिंधु सिस्टम के साझा इस्तेमाल के लिए आपसी सद्भावना, शांतिपूर्ण सहयोग और आपसी भरोसे पर आधारित है।' 
सीमा-पार आतंकवाद संधि का मौलिक उल्लंघन 
ब्रह्मा चेलानी ने आगे लिखा है- पाकिस्तान की मदद या प्रायोजित सीमा-पार आतंकवाद संधि को बनाए रखने के लिए आवश्यक नेक नीयती का मौलिक उल्लंघन है जबकि यह संधि बहुत ही उदारता से निचले हिस्से वाले पाकिस्तान के लिए 80% से ज्यादा पानी साझा करने की व्यवस्था करता है। 
पाकिस्तान का आचरण आपसी सद्भाव कमजोर करना 
ब्रह्मा चेलानी का कहना है कि 'सामान्य अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत एक पार्टी एक संधि को निलंबित कर सकती है या उससे बाहर निकल सकती है, भले ही समझौते में ऐसा करने का स्पष्ट प्रावधान न हो। इस बात की पुष्टि करने के लिए कई मिसालें मौजूद हैं।' 
पैक्टा संट सर्वंदा क्या है
पैक्टा संट सर्वंदा लैटिन का शब्द है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय कानून का सबसे पुराना और सबसे जरूरी नियम बताया जाता है। इसके बिना किसी भी अंतर्राष्ट्रीय समझौते या संधि का कोई महत्त्व नहीं। वियना कन्वेंशन के आर्टिकल 26 के जरिए इसे औपचारिक रूप भी दिया गया है। यह प्रावधान कहता है कि प्रत्येक संधि उससे जुड़े पक्षों पर बाध्यकारी है और वह 'नेक नीयती' के साथ पूरा किया जाए। 
जलसंकट के लिए पाकिस्तान खुद जिम्‍मेदार 
पाकिस्तान में इन दिनों पानी की भारी किल्लत है और शहबाज शरीफ की सरकार भारत पर आरोप मढ़ रही है। लेकिन असल में पाकिस्तान खुद अपनी वजह से दो बूंद पानी के लिए तरप रहा है। दरअसल पिछले कुछ वर्षों में भारत ने पूर्वी नदियों पर पानी जमा करने के लिए कई बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाए हैं और भारत के इन प्रोजेक्ट्स से पाकिस्तान को अपने निचले इलाकों जैसे लाहौर में बाढ़ रोकने में काफी मदद भी मिली है। इसीलिए एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर भारत को पानी को हथियार बनाना होता तो ये काम काफी पहले हो सकता था। 
हकीकत ये है कि सिंधु जल संधि के तहत भारत को पानी का जो हिस्सा मिला हुआ था वो भी भारत इस्तेमाल नहीं करता था। उसका एक हिस्सा पाकिस्तान में बहता था और अब भारत ने इस पानी को अपनी जरूरत के लिए बचाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान ने पिछले हफ्ते अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार कर सिंधु जल को लेकर भारत के खिलाफ जहर उगला है लेकिन इससे उसकी अपनी गलतियों पर परदा नहीं डल पाएगा।
सिंधु जल को कैसे अपनी जरूरत के लिए इस्तेमाल करेगा भारत?
भारत का पंजाब-जम्मू-कश्मीर सीमा पर लंबे समय से रुका हुआ शाहपुर कंडी बांध प्रोजेक्ट पूरा होने वाला है।
इससे रावी नदी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान में बहना बंद हो जाएगा और इसे सूखे से प्रभावित कठुआ और सांबा जिलों की ओर मोड़ दिया जाएगा।
चेनाब बेसिन और प्रस्तावित चेनाब-ब्यास नहर प्रणाली से जुड़े प्रोजेक्ट भी हैं। 2,532 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट चेनाब के अतिरिक्त पानी को ब्यास नदी प्रणाली की ओर मोड़ने में मदद करेगा।
लेकिन इन सभी प्रोजेक्ट्स का मकसद पाकिस्तान के हिस्से का पानी मोड़ना नहीं है बल्कि उस पानी का ज्यादा इस्तेमाल करना है जिसे भारत पहले इस्तेमाल नहीं कर रहा था। पाकिस्तान का आरोप है कि भारत पश्चिमी सिंधु नदियों का बहाव रोक रहा है लेकिन असल में दिल्ली के पास अभी ऐसा कोई इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है जिससे पानी का बहाव रोका जा सके या बड़ी मात्रा में पानी का रास्ता बदला जा सके। इनमें से ज्यादातर प्रोजेक्ट नदियों की सहायक नदियों पर बने 'रन-ऑफ-द-रिवर' हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट हैं और उनकी क्षमता 5 MW से भी कम है। 
3 प्वाइंट में जानिए पाकिस्तान ने खुद कैसे तैयार किया है पानी संकट?
पानी माफिया का राज: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पानी माफिया का राज है। वो जान बूझकर पानी संकट पैदा करते हैं। बांधों से ऊपर से गैर-कानूनी तरीकों से पानी निकाल लेते हैं।
बांधों की भारी कमी: पाकिस्तान में पानी जमा करने के लिए बहुत कम बांध बनाए गये हैं। मानसून में अरबों गैलन पानी बहकर समुद्र चला जाता है। उन्हें बचाने की कोशिशें नहीं की गई हैं।
गाद जमा होने से बांध भरे: पाकिस्तान के तरबेला और मंगला बांध में इतना ज्यादा गाद भरा हुआ है कि वहां बहुत कम पानी स्टोर हो पाता है। 
शरीफ और भुट्टो परिवारों की गलती का नतीजा जल संकट
पाकिस्तान जो आज जल संकट का सामना कर रहा है असल में वो शरीफ और भुट्टो परिवार की दशकों से लापरवाही का नतीजा है। सिंधु जल को लेकर पाकिस्तान ने की लापरवाही को लेकर कई बड़े सबूत हैं जिसे पाकिस्तान के लोगों को जानने की जरूरत है। 
पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2025-26 में पानी से जुड़ी परियोजनाओं के लिए फंड में 27% की कटौती कर दी। 184.6 अरब पाकिस्तानी रुपये से घटाकर 133.4 अरब पाकिस्तानी रुपये कर दिया गया। इसके अगले साल इसमें और 42% की कटौती की गई और फंड 103 अरब पाकिस्तानी रुपये हो गया।
पाकिस्तान ने पानी को स्टोर करने के लिए जलाशयों का निर्माण ही नहीं किया। पिछले साल मई में खरीफ फसल के अहम सीजन की शुरुआत में ही पाकिस्तान को 21% तक पानी की कमी का अंदाजा था। और उस वक्त तक भारत ने संधि को सस्पेंड भी नहीं किया था फिर भी पाकिस्तान ने पानी बचाने की कोशिश नहीं की। 
पानी को दशकों से कैसे बर्बाद करता रहा है पाकिस्तान
सिंधु जल मामलों के लिए भारतीय कमिश्नर (2016-2022) रहे प्रदीप कुमार सक्सेना के मुताबिक पानी की भारी बर्बादी के लिए पाकिस्तान खुद जिम्मेदार है। 'NatStrat' में लिखे एक लेख में उन्होंने कहा है कि 'आंकड़े चौंकाने वाले हैं। पाकिस्तान की तरफ से समुद्र में बिना इस्तेमाल किए बहा दिए जाने वाले पानी की कुल मात्रा सिंधु जल संधि के तहत भारत के कुल हिस्से के बराबर है।'
पाकिस्तान में फसल के लिए पानी की उत्पादकता दुनिया में सबसे कम है। सिंचाई के पुराने तरीकों और पानी की मांग के खराब प्रबंधन के कारण देश में हर साल लगभग 30 मिलियन एकड़-फीट पानी बर्बाद हो जाता है।
पाकिस्तान सिर्फ 30 दिनों के इस्तेमाल के लिए ही पानी जमा कर सकता है जबकि अमेरिका (कोलोराडो नदी) जैसे देश 900 दिनों तक का पानी जमा कर सकते हैं।
आंतरिक राजनीतिक विवादों और फंड की कमी के कारण कालाबाग बांध जैसे जरूरी जलाशयों के निर्माण में भारी देरी हुई है जिससे हर साल लाखों एकड़-फीट पानी बहकर समुद्र में चला जाता है।
कराची जैसे बड़े शहरों को पाइपलाइन से पानी के रिसाव, अवैध हाइड्रेंट और घरेलू पानी के वितरण में आधुनिकीकरण की पूरी तरह कमी की वजह से पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ता है।
पाकिस्तान के नॉर्थ वेस्ट कैनाल में पानी की कमी 64% है जबकि राइस कैनाल में यह कमी 38% है। दादू कैनाल में पानी की कमी चिंताजनक रूप से 82% है।
इन संकटों के लिए भारत बिल्कुल भी जिम्मेदार नहीं है। पाकिस्तान में गैर कानूनी तरीकों से यहां से पानी ऊपर से निकाल लिए जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान का पंजाब प्रांत अपने हिस्से के तय पानी से 20% ज़्यादा पानी निकाल रहा है। पिछले महीने जमात-ए-इस्लामी ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की अगुवाई वाली सिंध सरकार पर आरोप लगाया कि वह सालों तक सत्ता में रहने के बावजूद कराची में पानी की पुरानी किल्लत को दूर करने में नाकाम रही है। इसीलिए पाकिस्तान को भारत पर आरोप मढ़ने के बजाए खुद अपनी गलती पर ध्यान देना चाहिए। 
-Legend News

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