जापान की सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए भारत को मोगामी क्‍लास के युद्धपोत का ऑफर दिया है। जापान चाहता है कि उसकी तकनीकी मदद से भारत इस 50 करोड़ डॉलर के युद्धपोत को खुद से बनाए। यही नहीं जापान ने इस अपने सबसे घातक युद्धपोत को ऑस्‍ट्रेलिया को भी देना चाहता है। इन तीनों ही देशों का एक ही शत्रु है। वह है चीन। विश्‍लेषकों का कहना है कि अब तक रक्षात्‍मक रणनीति अपनाने वाला जापान अब खुलकर चीनी दादागिरी से निपटने में जुट गया है। इसी वजह से जापान ने भारत की नौसेना को यह अभूतपूर्व ऑफर दिया है। जापान चाहता है कि भारत हिंद महासागर में सुरक्षा मुहैया कराए। यही नहीं भारतीय नौसेना भी इस जापानी युद्धपोत की मुरीद है।
विश्‍लेषकों का कहना है कि अगर भारत, जापान और ऑस्‍ट्रेलिया तीनों ही इस मोगामी क्‍लास के युद्धपोत का इस्‍तेमाल करते हैं तो इससे वे एक-दूसरे के पोर्ट पर इन्‍हें मरम्‍मत भी आसानी से कर सकेंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीनी ड्रैगन की नौसेना फुफकार रही है। चीन के युद्धपोत लगातार हिंद महासागर के रास्‍ते अफ्रीका के जिबूती तक चक्‍कर लगा रहे हैं। चीन की सबमरीन भी हिंद महासागर में आने लगी हैं। ऐसे में तीनों ही देशों के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है। यह वही इलाका है जहां से जापान का ज्‍यादातर तेल गुजरता है। साथ ही दुनिया का सबसे व्‍यस्‍त व्‍यापारिक मार्ग मलक्‍का स्‍ट्रेट भी यही पर है। 
भारत दे हिंद महासागर में सुरक्षा, जापान का प्‍लान
इससे भारत को यह फायदा होगा कि वह इस अत्‍याधुनिक युद्धपोत को अपने यहां बना सकेगा। इससे भारतीय नौसेना की ताकत इतना ज्‍यादा बढ़ जाएगी कि वह आसानी से हिंद महासागर में 'सुरक्षा देने वाली' हो जाएगी। जापान ने जो अपना ऑफर दिया है, उसमें मोगामी युद्धपोत का डिजाइन और उसे भारतीय शिपयार्ड में जापानी मटेरियल की मदद से बनाने में मदद करना शामिल है। एक मोगामी क्‍लास के युद्धपोत को बनाने में 50 करोड़ डॉलर का खर्च आएगा। इसे एंटी शिप और एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइलों तथा टारपीडो की मदद से लैस किया जा सकता है। 
ऐसा पहली बार है जब जापान ने भारत को अपना कोई बहुत महत्‍वपूर्ण हथियार सिस्‍टम ऑफर किया है। व‍िश्‍लेषकों का कहना है कि यह ऑफर दिखाता है कि जापान रक्षा क्षेत्र में ज्‍यादा करीबी भागीदारी चाहता है। 21 अप्रैल को जापानी की कैबिनेट ने हथियारों के निर्यात और तकनीक को लेकर कड़े प्रतिबंधों को कम किया है। ऑस्‍ट्रेलिया के एडीलेड यूनिवसिर्टी में प्रोफेसर पुर्णेंद्र जैन ने साऊथ चाइना मॉर्निंग पोस्‍ट से बातचीत में कहा कि सह निर्माण का समझौता पीएम मोदी के 'मेक इन इंडिया' अभियान से मेल खाता है। इसके जरिए भारत अपने घरेलू रक्षा उत्‍पादन को बढ़ाना चाहता है। 
रूस से निर्भरत को घटा रहा है भारत
रिपोर्ट के मुताबिक भारत चाहता है कि उसकी आयात पर से निर्भरता कम हो जाए। भारत अपनी रूस पर से भी निर्भरता को कम करना चाहता है और इसी वजह से उसने हाल के वर्षों में फ्रांस, अमेरिका और अन्‍य पश्चिमी देशों से हथियारों का आयात बढ़ा रहा है। जैन ने बताया कि अभी आधिकारिक रूप से जापान ने अपना पूरा ऑफर नहीं दिया है। जेएनयू में जापानी अध्‍ययन के प्रोफेसर स्राबनी रॉय चौधरी ने कहा कि भारत की तटीय रेखा बहुत लंबी है। भारत को बंगाल की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक अपने तटों की सुरक्षा करनी होती है। यह जापान के मुक्‍त और स्‍वतंत्र हिंद प्रशांत की संकल्‍पना के हिसाब से प्रासंगिक है। 
जापान के मोगामी युद्धपोत की ताकत को जानें
मोगामी क्‍लास फ्रीगेट खासतौर पर एंटी सबमरीन युद्धकौशल के लिए बनाए गया है
जापानी युद्धपोत दुश्‍मन की सबमरीन को ट्रैक करता है, उसका शिकार करता है और रोकता है
यह युद्धपोत स्‍टील्‍थ तकनीक से लैस है जिससे दुश्‍मन के रडार की पकड़ में नहीं आता है
मोगामी फ्रीगेट मल्‍टी म‍िशन युद्धपोत है जो हाई ऑटोमेशन के लिए डिजाइन किया गया है
जापानी युद्धपोत को चलाने के लिए केवल 90 नौसैनिकों की जरूरत होती है जो इसी तरह के युद्धपोत के लिए आधे से भी कम है
जापान और भारत दोनों मिलकर इसके Unicorn रेडियो एंटेना को बनाने पर सहमत हुए हैं
जापान और ऑस्‍ट्रेलिया के बीच युद्धपोत के लिए 6.5 अरब डॉलर का समझौता हुआ है 
-Legend News

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