रिपोर्ट : LegendNews
अलगाववादी एजेंडे वाली किताब पर जम्मू विवि के छात्रों ने मांगा मंत्री सकीना इटू का इस्तीफा
जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय के छात्र 'पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जम्मू एंड कश्मीर' पुस्तक को जम्मू में अलगाववादी एजेंडे को हवा देने की साजिश मान रहे हैं.
'पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जम्मू एंड कश्मीर' (Personalities and Legends of Jammu and Kashmir) नाम की पुस्तक को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. जम्मू विश्वविद्यालय के छात्र इसे जम्मू क्षेत्र में अलगाववादी एजेंडे को हवा देने की साजिश मान रहे हैं. छात्रों का कहना है कि अलगाववादियों और आतंकवादियों की बड़ाई करने वाली पुस्तक को सिर्फ जम्मू इलाके के तीन जिलों जम्मू, उधमपुर और रामबन में आगे बढ़ाने के पीछे कोई छिपा हुआ एजेंडा है.
जम्मू विश्वविद्यालय के विधि विभाग के छात्र चेतन कुमार ने यूनिवर्सिटी के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा, "इस पुस्तक की 160 से ज्यादा कॉपी जम्मू इलाके के तीन जिलों में भेजी गईं, जबकि कश्मीर घाटी के किसी भी शिक्षण संस्थान में एक भी कॉपी नहीं भेजी गई. यह वही अलगाववादी एजेंडा है जो शेख मुहम्मद अब्दुल्ला ने महाराजा हरि सिंह के खिलाफ साजिश रची थी. अब वही एजेंडा जम्मू में आगे बढ़ाया जा रहा है."
उन्होंने कहा, "शिक्षा का उद्देश्य छात्रों में देशभक्ति और राष्ट्रवाद का संचार करना है, लेकिन इसके बजाय अलगाववादी एजेंडे को बढ़ावा दिया जा रहा है और उन लोगों का महिमामंडन किया जा रहा है, जिन्हें भारत के सुप्रीम कोर्ट ने फांसी पर चढ़ाया था."
लॉ स्टूडेंट ने कहा कि सरकार पुस्तक के एक लेखक का पता लगाने में भी नाकाम रही है.
विश्वविद्यालय के दूसरे छात्रों के साथ कुमार ने शिक्षा मंत्री सकीना इटू, जम्मू विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर और अन्य संबंधित लोगों के इस्तीफे की मांग की.
चेतन कुमार ने मांग की, "शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए कि इस किताब को शिक्षण संस्थान की लाइब्रेरी में क्यों और कैसे आने दिया गया. जम्मू विश्वविद्यालय के वीसी को भी यूनिवर्सिटी में किताब आने से रोकने में नाकाम रहने के लिए इस्तीफा दे देना चाहिए. उन सभी विभागों के हेड को भी इस्तीफा दे देना चाहिए, जहां यह किताब आई थी."
पुस्तक का मुद्दा 4 जुलाई को एक बड़े विवाद में बदल गया, जब जम्मू और कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता (LOP) सुनील शर्मा ने समग्र शिक्षा की एक कमेटी से मंजूरी मिलने के बाद इस किताब को शिक्षण संस्थान की लाइब्रेरी में भेजे जाने का मुद्दा उठाया. उस बयान के बाद, उपराज्यपाल ने समग्र शिक्षा के आठ कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया, किताब वापस ले ली और मामले की जांच के आदेश दिए.
- Legend News

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