विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को बायो-सिक्योरिटी को मजबूत करने और जैविक हथियार संधि (BWC) को और प्रभावी बनाने की जरूरत पर जोर दिया। यह संधि इस साल अपने 50 साल पूरे कर रही है।
वे नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन ‘50 Years of the Biological Weapons Convention: Strengthening Biosecurity for the Global South’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीक बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन उसे नियंत्रित करने वाले वैश्विक नियम इतने मजबूत नहीं हैं। इससे अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा को नए खतरे पैदा हो रहे हैं।
अपने भाषण की शुरुआत में उन्होंने कहा, BWC के 50 साल पूरे होने पर हम दोबारा याद दिलाना चाहते हैं कि बीमारी को कभी हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। बायोलॉजी का उद्देश्य शांति होना चाहिए, नुकसान नहीं। 
जयशंकर ने कहा कि BWC जीवन-विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार और उसके दुरुपयोग के बीच एक सुरक्षा दीवार की तरह है लेकिन यह सुरक्षा आगे आने वाले 50 वर्षों में कितनी मजबूत रहेगी, यह आज लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा।
उन्होंने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है और उन्नत जैविक उपकरण अब पहले से कहीं ज्यादा सस्ते और आसानी से उपलब्ध हैं। इससे प्राकृतिक, दुर्घटनावश या जानबूझकर पैदा होने वाले बायोलॉजिकल खतरों में तेजी से वृद्धि हो सकती है। ऐसे खतरे सीमाएं नहीं मानते और सिस्टम को जल्दी कमजोर कर सकते हैं, उन्होंने कहा। उनके अनुसार पब्लिक हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी गहराई से जुड़े हुए हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ में स्वास्थ्य ढांचा, लैब सुविधाएं, निगरानी व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया अभी भी कमजोर हैं। 
उन्होंने इंडिया की वैश्विक हेल्थ लीडरशिप का जिक्र करते हुए बताया कि —
भारत दुनिया के 60% वैक्सीन बनाता है
दुनिया की 20% जेनेरिक दवाएं भारत से आती हैं
अफ्रीका की 60% जेनेरिक दवाएं भारत सप्लाई करता है 
भारत में करीब 11,000 बायोटेक स्टार्टअप हैं— जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम है
साथ ही उन्होंने ICMR, DBT लैब्स, BSL-3/4 सुविधाओं, डिजिटल हेल्थ और भारत के बड़े रिसर्च नेटवर्क का उल्लेख किया।
डॉ. जयशंकर ने Vaccine Maitri का जिक्र करते हुए कहा कि कोविड महामारी के दौरान भारत ने करीब 300 मिलियन वैक्सीन डोज और मेडिकल सहायता 100 से अधिक देशों को भेजी। ऐसे समय में वैश्विक सहयोग ही जीवन बचाता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ समूहों द्वारा बायोलॉजिकल तकनीक का दुरुपयोग एक बड़ा उभरता खतरा है। बायो-टेररिज़्म गंभीर मुद्दा है, फिर भी BWC के पास आज भी न तो कॉम्प्लायंस सिस्टम है, न स्थायी टेक्निकल बॉडी, और न ही वैज्ञानिक प्रगति पर नज़र रखने की औपचारिक व्यवस्था।जयशंकर ने BWC के आधुनिकीकरण की जरूरत दोहराई और कहा कि भारत हमेशा से मजबूत वेरिफिकेशन सिस्टम, कम्प्लायंस मैकेनिज़्म, और वैज्ञानिक प्रगति की सिस्टमेटिक रिव्यू की मांग करता आया है। उन्होंने भारत के नेशनल इंप्लीमेंटेशन फ्रेमवर्क का भी जिक्र किया, जिसमें हाई-रिस्क एजेंट की पहचान, डुअल-यूज़ रिसर्च की निगरानी, घटना प्रबंधन और लगातार प्रशिक्षण शामिल है।
उन्होंने बताया कि भारत Wassenaar Arrangement, MTCR और Australia Group जैसे वैश्विक नॉन-प्रोलिफरेशन प्लेटफॉर्मों में सक्रिय भूमिका निभाता है, जिनमें से ऑस्ट्रेलिया ग्रुप का बायो-सिक्योरिटी से खास संबंध है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा, नियम तभी टिकते हैं जब देश उन्हें लगातार मजबूत करते रहें… हमें BWC का आधुनिकीकरण करना होगा, विज्ञान की रफ्तार के साथ चलना होगा और दुनिया की क्षमता बढ़ानी होगी ताकि सभी देश बायोलॉजिकल जोखिमों का पता लगा सकें, रोक सकें और समय पर जवाब दे सकें। भारत तैयार है। 
-Legend News

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