विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन की अपनी पांच साल में पहली यात्रा के दौरान आतंकवाद पर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने SCO परिषद की बैठक में जम्मू और कश्मीर में हुए आतंकी हमले का मुद्दा उठाया। जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था को स्थिर करने के लिए आपसी विश्वास पर आधारित क्षेत्रीय सहयोग की तत्काल आवश्यकता है। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद यह उनकी पहली चीन यात्रा है। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले में 26 लोग मारे गए थे। इस हमले का मकसद जम्मू-कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था को कमजोर करना और धार्मिक विभाजन पैदा करना था।
आतंकवाद पर सख्त रुख अपनाएं
विदेश मंत्री एस जयशंकर मंगलवार को तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) परिषद की बैठक में शामिल हुए। उन्होंने पहलगाम में हुए आतंकी हमले का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को SCO के मूल उद्देश्यों के प्रति सच्चा रहना चाहिए। आतंकवाद पर बिना किसी समझौते के सख्त रुख अपनाना चाहिए। जयशंकर ने कहा कि पहलगाम में 22 अप्रैल को जो हमला हुआ, जिसमें 26 लोग मारे गए, वह जानबूझकर जम्मू और कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया था। इसका मकसद धार्मिक विभाजन पैदा करना था। 
विदेश मंत्री ने SCO परिषद की बैठक में बोलते हुए कहा, 'संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, जिसके कुछ सदस्य हम भी हैं, ने एक बयान जारी किया। इसमें हमले की कड़ी निंदा की गई। परिषद ने इस घृणित आतंकवादी कृत्य के अपराधियों, आयोजकों, फाइनेंसरों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराने और उन्हें न्याय के कटघरे में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। 
आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद
मंत्री ने कहा कि SCO की स्थापना तीन बुराइयों - आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद - से लड़ने के लिए की गई थी। ये तीनों अक्सर एक साथ होते हैं। जयशंकर ने कहा, "यह जरूरी है कि SCO अपने मूल उद्देश्यों के प्रति सच्चा रहे। इस चुनौती पर बिना किसी समझौते के सख्त रुख अपनाए।" जयशंकर ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय सहयोग की तत्काल आवश्यकता है। यह आपसी विश्वास पर आधारित होना चाहिए। इससे वैश्विक व्यवस्था को स्थिर करने में मदद मिलेगी।
अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में काफी उथल-पुथल है
उन्होंने कहा, "हम एक ऐसे समय में मिल रहे हैं जब अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में काफी उथल-पुथल है। पिछले कुछ सालों में हमने ज्यादा संघर्ष, प्रतिस्पर्धा और दबाव देखा है। आर्थिक अस्थिरता भी बढ़ रही है। हमारे सामने चुनौती वैश्विक व्यवस्था को स्थिर करना, विभिन्न आयामों से जोखिम को कम करना और उन पुरानी चुनौतियों का समाधान करना है जो हमारे सामूहिक हितों को खतरे में डालती हैं।" 
जयशंकर ने कहा कि दुनिया बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रही है। यह सिर्फ राष्ट्रीय क्षमताओं के पुनर्वितरण के मामले में ही नहीं है, बल्कि SCO जैसे प्रभावी समूहों के उभरने के मामले में भी है। उन्होंने कहा, "विश्व मामलों को आकार देने में हमारी क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि हम एक साझा एजेंडे पर कितनी अच्छी तरह से एक साथ आते हैं। 
लड़ाई-झगड़े बढ़ रहे, देशों में होड़ मची
एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया में कई तरह की परेशानियां हैं। लड़ाई-झगड़े बढ़ रहे हैं, देशों में होड़ मची है और एक-दूसरे पर दबाव बनाया जा रहा है। इससे आर्थिक स्थिति भी खराब हो रही है इसलिए हमें मिलकर काम करना होगा ताकि दुनिया में शांति बनी रहे। हमें खतरों को कम करना होगा और उन समस्याओं को हल करना होगा जिनसे हम सभी को नुकसान हो रहा है।
-Legend News

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