पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने शुक्रवार को मक्का में एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जो पश्चिम एशिया के सुरक्षा ढांचे को पूरी तरह से बदल सकता है। इनमें से किसी एक पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। इस समझौते के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पाकिस्तान सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर गुरुवार को ही सऊदी अरब पहुंचे थे। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयब एर्दोगन भी शुक्रवार को समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए सऊदी अरब पहुंच गए थे। डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, फिलहाल, इस रक्षा समझौते को इस्लामी नाटो ( Islamic NATO) कहा जा रहा है जिससे सबसे ज्यादा खतरा भारत और इजरायल को है। सोढ़ी के अनुसार भारत ने पहले ही इस खतरे को भांपते हुए 'बिग-5' वाला एक मजबूत रणनीतिक और रक्षा संबंध बनाए हैं। यह रणनीतिक रूप से भारत का पाकिस्तान-तुर्की और सऊदी अरब की तिकड़ी के खिलाफ दमदार पंच साबित होगा। 
Islamic NATO: तुर्की-सऊदी और पाक की तिकड़ी खतरा
सऊदी की दौलत, तुर्की की टेक्नोलॉजी और पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों के दम पर ये गठबंधन बना है। पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्की समझौता पिछले साल घोषित सऊदी-पाकिस्तान आपसी रक्षा समझौते का ही एक स्वाभाविक विस्तार है। पाकिस्तान-सऊदी समझौते की तरह ही, यह तीन देशों का गठबंधन एक इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी नेटवर्क बनाने के लिए हर सदस्य देश की खास खूबियों का इस्तेमाल करेगा।
भारत के स्ट्रेटेजिक थिंकर और एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्माचेलानी ने सोशल मीडिया एक्स पर इस पैक्ट को भारत के लिए बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने 2025 के मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की की ओर से पाकिस्तान को सैन्य ड्रोन दिए जाने का हवाला भी दिया है। 
भारत करीब से नजर रखे हुए है, कही ये बात
भारत ने भी पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के रक्षा समझौते पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि भारत इस मामले पर करीब से नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा-‘यह एक ऐसा डेवलपमेंट है जिसे हम करीब से फॉलो कर रहे हैं और हम आपको अपडेट रखेंगे।’ 
भारत की इजरायल, UAE, ग्रीस और साइप्रस से मजबूत दोस्ती
डिफेंस एनालिस्ट जेएस सोढ़ी के अनुसार भारत ने पहले से ही इस्लामिक नाटो के खतरे को भांपते हुए 'बिग-5' की पूरी तैयारी कर रखी है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर इस साल संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल के दौरे करते रहे हैं। साथ ही ग्रीस और साइप्रस से भी सहयोग बढ़ाया है। वहीं, भारत के सऊदी अरब से भी अच्छे संबंध हैं। ये अनायास ही नहीं है।
सोढ़ी ने आगे कहा-'भारत ने तुर्की के दुश्मनों साइप्रस और ग्रीस से समझौते किए तो वहीं पाकिस्तान को नापसंद करने वाले यूएई और इजरायल से दोस्ती और मजबूत की है।इस समझौते के एक दिन पहले ही इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी से फोन पर बात की थी। इजरायल भारत समेत कई देशों को मिलाकर एक सैन्य गठबंधन बनाना चाहता है।' 
सऊदी अरब ने पहले ही क्लियर कर दी हर बात
डिफेंस एनालिस्ट जेएस सोढ़ी के अनुसार सऊदी अरब आर्थिक ताकत, रणनीतिक गहराई और क्षेत्रीय प्रभाव का योगदान देगा। वहीं, तुर्की एडवांस्ड मिलिट्री टेक्नोलॉजी (खासकर ड्रोन में) और NATO-स्टैंडर्ड का मिलिट्री-इंडस्ट्रियल बेस उपलब्ध कराएगा। जबकि पाकिस्तान न्यूक्लियर क्षमताएं और युद्ध में आजमाई हुई सेना का योगदान देगा।
हालांकि, सऊदी अरब के पब्लिक डिप्लोमेसी के डिप्टी मिनिस्टर डॉ रायेद क्रिमली ने पहले ही साफ कर दिया है कि यह समझौता किसी मिलिट्री गुट या सांप्रदायिक ब्लॉक को बनाने की कोशिश नहीं है और इसका संबंध किसी परमाणु या हथियारों की होड़ से है।
सऊदी-पाकिस्तान में पहले ही रक्षा समझौता
Islamic NATO कहे जा रहे इस गठबंधन में संयुक्त सैन्य अभ्यास, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, डिफेंस-इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और इंटेलिजेंस-शेयरिंग शामिल होंगे। सऊदी-पाकिस्तान आपसी रक्षा समझौते के तहत, पाकिस्तान ने सऊदी अरब में लगभग 25,000 सैनिक तैनात करने पर सहमति जताई थी।
इन सैनिकों को सैन्य, आर्टिलरी, इन्फैंट्री और रॉकेट यूनिट्स के साथ-साथ दो एयर फोर्स स्क्वाड्रन और दो नेवल फ्लीट का सपोर्ट भी मिलना था। इस तैनाती का मकसद सऊदी अरब की सुरक्षा में मदद करना, संयुक्त ऑपरेशन चलाना और सऊदी सेना को ट्रेनिंग देना था, जिसके बदले में सऊदी अरब 10 अरब डॉलर का निवेश करने वाला था। 
-Legend News

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