जम्मू-कश्मीर को लेकर यूरोपीय यूनियन और पाकिस्तान के स्टेटमेंट पर भारत ने जोरदार पलटवार किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ऐसे लोगों को भारत के मामलों में बयानबाजी करने से बचना चाहिए, जिनका इन मसलों में कोई अधिकार ही नहीं है। भारत ने दोनों के संयुक्त बयान को पूरी तरह से खारिज कर दिया। 
असीम मुनीर से भी की थी मुलाकात
दरअसल, यूरोपीय कमीशन की उपाध्यक्ष काजा कल्लास की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को उठाया था। सोमवार को इस्लामाबाद में पाकिस्तान और यूरोपीय यूनियन की 9वीं रणनीतिक बातचीत के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया था। काजा कल्लास ने इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर से भी मुलाकात की थी। 
मीटिंग के बाद क्या संयुक्त बयान दिया
काजा कल्लास और पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार की मीटिंग के बाद जो संयुक्त बयान जारी किया गया था, उसमें कहा गया था कि पाकिस्तान पक्ष ने जम्मू और कश्मीर के मुद्दे पर जानकारी दी और यूरोपीय यूनियन ने यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध के बारे में जानकारी दी। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर सिद्धांतों के मुताबिक बातचीत और कूटनीति के माध्यम से संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
एक्सपर्ट्स ने किस बात पर जताई चिंता
बता दें कि ईयू की तरफ से आए इस बयान के बाद एक्सपर्ट्स ने इसे भारत के खिलाफ बताया था। विशेषज्ञों ने कहा था कि इस तरह के बयान देने का मतलब है कि यूरोपीय यूनियन यह मान रहा है कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा इंटरनेशनल मामला है, जिसमें भारत और पाकिस्तान के अलावा किसी तीसरे पक्ष को भी शामिल किया जा सकता है।
-Legend News

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