मई 2025 में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान ने चीनी फाइटर जेट्स के दम पर भारत के खिलाफ काफी दुष्प्रचार किया था। चीन ने भी अपने J-10CE विमानों का खूब महिमामंडन किया था। लेकिन ठीक एक साल बाद, जून 2026 की तस्वीरें पूरी तरह से बदल चुकी हैं। दुनिया के हथियार बाजार से चीन के फाइटर जेट्स की चर्चा गायब है, जबकि भारत की ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने तहलका मचा रखा है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि ब्रह्मोस के सबसे बड़े खरीदार खुद चीन के पड़ोसी देश बन रहे हैं। 
'ऑपरेशन सिंदूर' में कैसे फेल हुआ चीन और पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा?
पिछले साल भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों और एयरबेस जैसे नूर खान, जैकबाबाद और सरगोधा आदि पर मल्टी-डोमेन स्ट्राइक की थी। इस निर्णायक कार्रवाई में भारत ने ब्रह्मोस, स्कैल्प (SCALP) क्रूज मिसाइलों और राफेल जेट्स का शानदार समन्वय दिखाया था।
हाल ही में चीनी सरकारी मीडिया CCTV पर चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन इंस्टीट्यूट के इंजीनियरों ने खुद कबूल किया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान वे पाकिस्तानी एयरबेस पर J-10CE फाइटर जेट्स को सपोर्ट देने के लिए मौजूद थे।
बैकफायर हुआ चीन और पाकिस्तान का प्लान
चीन और पाकिस्तान को उम्मीद थी कि J-10CE भारतीय राफेल और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को टक्कर देंगे। लेकिन 10 घंटे चले भारतीय एयर ब्लिट्ज के सामने पाकिस्तानी डिफेंस पूरी तरह चरमरा गया। इस एकतरफा जीत ने चीनी हथियारों और फाइटर जेट्स की विश्वसनीयता पर दुनिया के सामने बड़ा सवालिया निशान लगा दिया। 
साउथ चाइना सी में तैयार हो रही भारत की 'ब्रह्मोस वॉल'
चीन के फाइटर जेट्स का प्रचार जहां फुस्स हो गया, वहीं भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने चीन को उसी के आंगन यानी साउथ चाइना सी में घेरना शुरू कर दिया है।
वियतनाम के साथ नई डील: जून 2026 की लेटेस्ट रिपोर्ट्स के अनुसार फिलीपींस के बाद अब वियतनाम ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा बड़ा देश बन गया है।
कतार में हैं ये देश: इंडोनेशिया अगला खरीदार बनने के लिए तैयार है जबकि मलेशिया और थाईलैंड ने भी ब्रह्मोस को लेकर गहरी दिलचस्पी दिखाई है। 
चीन के लिए सिरदर्द: इन देशों को ब्रह्मोस मिलने का सीधा मतलब है साउथ चाइना सी के तटीय इलाकों में 'ब्रह्मोस बैटरियों' की एक मजबूत चेन तैयार होना। ब्रह्मोस की अचूक स्पीड (लगभग 3 मैक) चीन की नौसेना की आक्रामकता के लिए सबसे बड़ा प्रतिरोध बन गई है। 
सिर्फ एशिया ही नहीं, ग्लोबल मार्केट में ब्रह्मोस का जलवा
भारत अब सिर्फ एक हथियार सप्लायर नहीं, बल्कि एक 'फ्रेंडली डिफेंस पार्टनर' के रूप में उभर रहा है। पश्चिमी देशों की तरह भारत हथियारों के साथ राजनीतिक शर्तें नहीं थोपता, बल्कि लॉजिस्टिक सपोर्ट, ट्रेनिंग और मेंटेनेंस का पूरा इकोसिस्टम देता है।
अन्य देशों से बातचीत: एशिया के बाहर भी संयुक्त अरब अमीरात (UAE), चिली और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के साथ ब्रह्मोस के निर्यात को लेकर एडवांस स्टेज में बातचीत चल रही है। 
पाकिस्तान ने चीनी फाइटर जेट्स के बलबूते जो चुनौती पेश करने की कोशिश की थी, वह 'ऑपरेशन सिंदूर' में उसी पर भारी पड़ गई। आज नतीजा यह है कि चीन के हथियारों से दुनिया का भरोसा उठ रहा है और भारत की 'ब्रह्मोस' ग्लोबल डिफेंस मार्केट में एक रियल गेम-चेंजर बनकर सामने आई है। 
-Legend News

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