रिपोर्ट : LegendNews
सालभर बाद भी सिंधु जल संधि को लेकर भारत अपने रुख पर कायम, बुरी तरह छटपटा रहा है पाकिस्तान
भारत की ओर से सिंधु जल संधि (IWT) को रोके जाने को लेकर करीब सालभर हो चुके हैं। मगर, भारत के रुख में अब भी कोई बदलाव नहीं आया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने ऑपरेशन सिंदूर के साल भर होने के अवसर पर कहा है कि जब तक पाकिस्तान की ओर से सीमापार आतंकवाद जारी रहेगा, तब तक सिंधु जल संधि निलंबित रहेगी। वहीं, इससे पहले पाकिस्तान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने हाल ही में इसे लेकर एक चेतावनी भी जारी की। इसमें कहा गया है कि सिंधु नदी प्रणाली के पानी को मोड़ा गया तो इसे 'एक्ट ऑफ वॉर' यानी युद्ध जैसी हरकत माना जाएगा। अभी इस संधि की बहाली को लेकर कोई संकेत भी नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान की छटपटाहट साफ दिख रही है, क्योंकि पाकिस्तानी आर्मी के जनरल से लेकर पाकिस्तानी एनालिस्ट तक भारत के रुख से चिढ़े हुए हैं। वह भी तब, जब हाल ही में पाकिस्तान अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर कोशिशें कर रहा था, ताकि दुनिया की नजर में वह शांति का अगुवा बन सके। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी अमेरिका के कई चक्कर भी लगाए और खुद को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चहेता दिखाने की भी कोशिशें कीं, मगर अब सिंधु जल संध को लेकर भारत के रुख ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है।
सिंधु जल संधि: भारत ने पाकिस्तान को फिर सुनाया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा-पूरी दुनिया ने पहलगाम आतंकी हमले को उसके वास्तविक रूप में देखा। हमने सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया। उन्होंने कहा-पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित करने के जवाब में सिंधु जल संधि स्थगित की गई है। पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद के प्रति अपने समर्थन को स्पष्ट और बिना किसी बदले हुए रूप में छोड़ना होगा। पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच नदी जल बंटवारे को नियंत्रित करने वाली सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया गया था।
सिंधु जल संधि के निलंबन के एक साल बीत जाने के बाद भी भारत ने अपने बांध बंद रखे हैं। रामबन जिले में चिनाब नदी पर बने बगलिहार बांध के सभी द्वार सिंधु जल संधि के निलंबन के एक साल बाद भी बंद हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ प्रतिक्रिया को दर्शाता है और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए देश की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
पाकिस्तान के आर्मी जनरल ने दी गीदड़भभकी
सिंधु जल संधि के निलंबन पर पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशन (ISPR) के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने भी धमकी दी है। उन्होंने कहा-कश्मीर एक दिन पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा और वहां से बहने वाली नदियों पर उनका कब्जा होगा। ऐसे हालात में पाकिस्तान यह फैसला करेगा कि भारत को पानी देना है कि नहीं।
पाकिस्तान के पेट में दर्द, भारत तेजी से पूरा कर रहा हाइड्रो प्रोजेक्ट्स
पाकिस्तान की चर्चित वेबसाइट डॉन पर छपे एक लेख में पाकिस्तान की निराशा साफ नजर आ रही है। इसमें कहा गया है कि भारत बड़ी संख्या में कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को पूरा करने में लग गया है। वह तेजी से इन प्रोजेक्ट्स के लिए फंड दे रहा है। साथ ही भारत ने पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए कई प्रोजेक्ट्स के डिजाइन में जरूरी बदलाव को भी मंजूरी दे डाली है। साथ ही भारत ने किशनगंगा प्रोजेक्ट के जरिए पानी के बहाव को मोड़ने के उपाय भी कर रहा है।
भारत ने तीन प्रोजेक्ट्स का दायरा बढ़ाकर चिनाब तक किया
पाकिस्तान के इंटरनेशनल सिक्योरिटी को लेकर एक स्ट्रेटेजिस्ट खुर्रम अब्बास के लेख में कहा गया है कि इंडियन नेशनल रजिस्टर ऑफ लार्ज डैम की लिस्ट में शामिल 15 बड़े बांध जम्मू-कश्मीर में हैं। किरू, क्वॉर और पाकल दुल ऐसी परियोजनाएं हैं, जिनका दायरा भारत ने बढ़ाकर चिनाब की सहायक नदियों तक कर दिया है।
किरू, क्वार और पाकल दुल जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी और उसकी सहायक नदियों पर बन रही प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएं हैं। माना जा रहा है कि ये परियोजनाएं उत्तर भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और पूरे जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के विकास में अहम साबित होंगी।
नापाक चिंता: भारत तेजी से अपग्रेड कर रहा पानी का भंडार
पाकिस्तान को एक चिंता यह भी खाए जा रही है कि भारत तेजी से अपने स्थानीय स्टोरेज सिस्टम और नहरों को अपग्रेड कर रहा है। साथ ही वह अपनी सिंचाई योजना और आंतरिक वाटर बेसिन को भी मजबूत कर रहा है।
पाकिस्तान की एक बड़ी चिंता यह भी है कि भारत के इन उपायों से उसके यहां पानी की कमी हो सकती है। इससे भारत में पानी की मात्रा तो ज्यादा रह सकती है, मगर पाकिस्तान में पानी का संकट खड़ा हो सकता है।
अप्रैल, 2025 के बाद से भारत ने वाटर कंट्रोल स्ट्रेटेजी अपनाई है। हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स की वजह से भारत की पश्चिमी नदियों में पानी के भंडार की क्षमता दो से तीन गुना तक बढ़ सकती है, जो पानी के बहाव को नियंत्रित कर सकते हैं। भारत के ये ज्यादा प्रोजेक्ट्स 2030 से 2032 के बीच पूरे होने वाले हैं।
पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने चिढ़कर दिए दो सुझाव
इस लेख में भारत के इन उपायों को कमतर करने के लिए पाकिस्तान को कुछ सुझाव दिए गए हैं। खुर्रम अब्बास ने लिखा है-सिंधु जल समझौते को निलंबित करने के भारत के फैसले का मुकाबला करने के लिए इस्लामाबाद को एक रणनीतिक निर्णय लेना चाहिए। पाकिस्तान को या तो नई दिल्ली को अपना निर्णय बदलने के लिए राजी करना चाहिए या उसे ऐसा करने के लिए मजबूर करना चाहिए। इस्लामाबाद ने अब तक भारत पर दबाव बनाने के लिए बहुस्तरीय कानूनी और राजनयिक दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी है।
पाकिस्तान ने इस मामले में अब तक क्या किया
पाकिस्तान ने अनियमित जल प्रवाह और डेटा आदान-प्रदान के निलंबन पर औपचारिक रूप से चिंता जताते हुए संधि के प्रक्रियात्मक ढांचे का लाभ उठाने का प्रयास किया है। यह चिंता सिंधु जल आयुक्त और उनके भारतीय समकक्ष के बीच पत्राचार के माध्यम से जताई गई है।
दूसरा, इस्लामाबाद ने हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के समक्ष रतले और किशनगंगा जैसी परियोजनाओं से संबंधित विवादों को आगे बढ़ाना जारी रखा है। पिछले वर्ष अगस्त में, पीसीए ने अंतर्राष्ट्रीय जल संधि (IWT) की व्याख्या पर एक बाध्यकारी निर्णय जारी किया था। हालांकि, नई दिल्ली ने न्यायालय के इस निर्णय को खारिज कर दिया है।
तीसरा, इस्लामाबाद ने संधि को बहाल करने के लिए विश्व बैंक से इस मामले में हस्तक्षेप की उम्मीद जताई है।
भारत ने यूएन में भी पाकिस्तान को दो टूक सुना दिया
भारत ने सिंधु जल संधि के निलंबन पर साफ रुख अपनाया है और यह कहता आ रहा है-'खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते'। भारत ने 1960 से ही सिंधु जल संधि के नियमों का हमेशा पालन किया है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ उसकी 'जीरो टॉलरेंस' की नीति रही है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में भी यह साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करता, तब तक जल सहयोग सामान्य नहीं हो सकता।
इसी साल मार्च में संयुक्त राष्ट्र में एक उच्च स्तरीय कार्यक्रम में, सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान द्वारा जताई गई चिंताओं का भारत ने करारा जवाब दिया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा-जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के केंद्र के रूप में अपनी भूमिका खत्म नहीं करता, तब तक यह संधि निलंबित रहेगी। इस्लामाबाद के पिछले रिकॉर्ड की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के धैर्य और सद्भावना का जवाब संघर्ष और आतंकी हमलों से दिया गया है। यह बयान वैश्विक मंच पर नई दिल्ली की ओर से एक मजबूत कूटनीतिक कदम का संकेत है।
पाकिस्तान कानूनी रास्ते पर भी खा रहा मात
पाकिस्तान ने व्यापक अंतरराष्ट्रीय कानूनी रास्ते भी तलाशे हैं। इस्लामाबाद ने भारत के आचरण को अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से संधि कानून पर वियना कन्वेंशन का उल्लंघन बताते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना का संकेत दिया है। कूटनीतिक रूप से, इस्लामाबाद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और कई अन्य बहुपक्षीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाया है और भारत की कार्रवाइयों को 'जल का हथियारीकरण' बताया है। साथ ही, पाकिस्तान ने हाइड्रोलॉजिकल डेटा के निलंबन और चिनाब नदी में अनियमित प्रवाह सहित उल्लंघनों का व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकरण किया है।
सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty) क्या है
19 सितंबर 1960 को कराची में सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) हुई थी। उस वक्त भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच ये समझौता हुआ था। इस समझौते में विश्व बैंक ने मध्यस्थता कराई थी। यह संधि सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के जल बंटवारे से संबंधित है। अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद भारत ने इस संधि को स्थगित कर दिया है, जिससे अब सभी 6 नदियों पर भारत का नियंत्रण है।
पूर्वी नदियां (ब्यास, रावी, सतलुज) का पूरा नियंत्रण भारत को मिला। वहीं, पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चेनाब) का मुख्य नियंत्रण पाकिस्तान को दिया गया। हालांकि, भारत को भी इन नदियों के पानी के सीमित इस्तेमाल (कृषि, बिजली उत्पादन) की अनुमति दी गई थी।
सिंधु जल संधि से भारत के पास 20 फीसदी और पाकिस्तान के पास 80 फीसदी पानी के इस्तेमाल का अधिकार दिया गया था। संधि को लागू करने के लिएदोनों देशों के कमिश्नरों की बैठक का प्रावधान भी इस संधि में है।
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