रिपोर्ट : LegendNews
1971 पार्ट-2 करने को तैयार भारत, कोलकाता के पास हल्दिया में नया नौसैनिक अड्डा बनाने का एलान
बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद वहां पर पिछले डेढ़ साल से अस्थिरता का माहौल बना रहा है. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश अब कट्टरपंथ की राह में तेजी से आगे बढ़ रहा है. साथ ही भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए चीन, पाकिस्तान, तुर्की और यूएस के साथ भी अपनी पींगें बढ़ा रहा है. उसके नेताओं की नजरें भारत के पूर्वोत्तर को काटकर ग्रेटर बांग्लादेश बनाने पर है. वहां के कई नेता और रिटायर्ड अफसर खुलकर इस बारे में भारत को धमकी भी दे चुके हैं. इन खतरों को ध्यान में रखते हुए भारत अब बांग्लादेश के पास अपनी नौसैनिक उपस्थिति मजबूत करने जा रहा है. उसने कोलकाता के पास हल्दिया में नया नौसैनिक अड्डा बनाने का एलान किया है. आज आपको भारत के इस ऐलान के मायने समझने चाहिए. जिसके बाद आपको पता चलेगा कि भारत ने संकट की स्थिति में 1971 पार्ट-2 करने की तैयारी शुरू कर दी है.
हल्दिया में बनेगा नया नेवल बेस
भारत बंगाल की खाड़ी में चीन और बांग्लादेश की बढ़ती गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पश्चिम बंगाल के हल्दिया में एक नया नौसैनिक अड्डा स्थापित करने जा रहा है. यह कदम उस समय उठाया जा रहा है जब हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी नौसेना की मौजूदगी तेजी से बढ़ रही है.साथ ही बांग्लादेश-पाकिस्तान के साथ चीन के सैन्य संबंध गहरे हो रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक हल्दिया में बनने वाला नया अड्डा भारतीय नौसेना की 'डिटैचमेंट यूनिट' के रूप में काम करेगा. अड्डा कोलकाता से करीब 100 किमी दूर हल्दिया में बनाया जाएगा. यहां पर लगभग 100 अधिकारी और नाविक तैनात होंगे. यहां से हुगली नदी के रास्ते जाने की जरूरत बिना सीधे बंगाल की खाड़ी तक पहुंचा जा सकता है.
घूमते हुए आत्मघाती ड्रोन से लैस होंगे युद्धपोत
इस बेस पर फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट (FIC) और 300 टन वजनी न्यू वाटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट (NWJFAC) तैनात किए जाएंगे. ये जहाज 40 से 45 नॉट की गति से चल सकते हैं. साथ ही समुद्र में किसी भी खतरे पर तुरंत कार्रवाई करने में सक्षम हैं.
इन युद्धपोतों में CRN-91 तोपें होंगी. इसके साथ ही उन्हें नागास्त्र जैसे घूमते हुए आत्मघाती ड्रोन हथियारों से भी लैस किया जाएगा. जिससे ये जहाज दुश्मन पर सटीक हमला करने और समुद्री निगरानी करने में बेहद प्रभावी बन जाएंगे. इस बेस के बनने से उत्तरी बंगाल की खाड़ी में भारत की समुद्री पकड़ और निगरानी क्षमता और मजबूत हो जाएगी.
छोटे युद्धपोत चुनने की वजह
इस नौसेना बेस पर छोटे युद्धपोत करने की खास वजह है. असल में यहां पर हुगली (गंगा) नदी बंगाल में प्रवेश कर रही होती है. जिसकी वजह से उसकी धारा की गति बहुत कम हो जाती है और गाद ज्यादा भरी होती है. दूसरी बात इसी हल्दिया नदी से सामान से भरे कॉर्गो शिप कोलकाता पहुंचते हैं. इसके चलते बड़े युद्धपोत यहां पर ज्यादा कारगर नहीं हो सकते है. यही वजह है कि यहां पर तेज और फुर्तीले छोटे जहाजों को तैनात करने का फैसला लिया गया है.
मिलिट्री एक्सपर्टों के मुताबिक भारत और बांग्लादेश के बीच भले ही रिश्ते इस वक्त सबसे खतरनाक दौर में चल रहे हैं. इसके बावजूद बांग्लादेश चाहकर भी भारत पर हमले की हिमाकत नहीं कर सकता. इसकी वजह दोनों मुल्कों की सैन्य क्षमता में जबरदस्त अंतर है, जिसका बांग्लादेशी नेताओं और सेना को भी भली भांति पता है. लेकिन वह अपने सैन्य अड्डे चीन-पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों के लिए खोलकर भारत के खिलाफ माहौल जरूर बना सकता है.
बड़े युद्ध में जाए बिना गर्दन तोड़ने की तैयारी
ऐसी स्थिति में बिना पूर्ण युद्ध शुरू किए भारत हल्दिया नौसैनिक अड्डे से बांग्लादेश की जब चाहे, तब गर्दन मरोड़ सकता है. बांग्लादेश के पास 2 बड़े बंदरगाह हैं. जिनमें एक मोंगला पोर्ट और दूसरा चटगांव पोर्ट है. इन्हीं दोनों बंदरगाहों के जरिए बांग्लादेश दुनिया से व्यापार करता है. साथ ही वहीं पर उसके 2 नेवल बेस भी हैं. ऐसे में झड़प की स्थिति में भारत हल्दिया बेस से अपने छोटे युद्धपोतों के जरिए इन दोनों बंदरगाहों की नाकाबंदी कर वहां की सरकार और सेना को पंगु बना सकता है.
अगर संघर्ष में चीन या पाकिस्तान हिमायती बनकर आने की कोशिश करते हैं तो विशाखापत्तनम के नेवल बेस और अंडमान-निकोबार की ट्राई सर्विस कमांड के जरिए भारत उनके युद्धपोतों को बांग्लादेश पहुंचने से पहले ही जलसमाधि दे देगा. पूरी बंगाल की खाड़ी में भारत की पकड़ इतनी मजबूत है कि यहां पर बचकर सुरक्षित निकल पाना दुश्मन के लिए लगभग असंभव होगा.
इस बेस की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी नौसेना की गतिविधियां बढ़ रही हैं. साथ ही शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद पाकिस्तान भी फिर से भारत के खिलाफ साजिशें करने में जुटा हुआ है. ऐसे में भारत के पूर्वी समुद्री मोर्चे पर खतरा बढ़ रहा है. यही वजह है कि मोदी सरकार ने 2024 में 120 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट और 31 न्यू वाटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट की खरीद को मंजूरी दी थी. दूसरे शब्दों में कहा जाए तो सरकार को अंदाजा है कि आने वाला वक्त कैसा हो सकता है इसलिए उसके हिसाब से अभी से तैयारियां की जा रही हैं.
-Legend News

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