एलएसी पर अब भारत ने चीन की कारगुजारियों का करारा जवाब देने की पुख्ता तैयारी कर ली है. इसी के तहत भारत ने अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती गांवों को ‘टूरिस्ट हब’ बनाने की ओर कदम आगे बढ़ा दिए हैं. सिविल-मिलिट्री पार्टनरशिप के तहत सीमावर्ती गांवों का ये कायाकल्प चीन के कथित मॉडल विलेजेस प्रोग्राम को धूल चटाने के लिए तैयार किया जा रहा है. दोनों देशों के बीच तनाव पिछले हफ्ते उस समय और बढ़ गया था जब बीजिंग ने भारतीय राज्य में 11 स्थानों का नाम बदल दिया था, जिसे वह “तिब्बत का दक्षिणी हिस्सा जांगनान” कहता है.
फस्टपोस्ट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस घटनाक्रम को पिछले 10 वर्षों में लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक के क्षेत्रों में एलएसी के करीब चीन के तथाकथित मॉडल गांवों या शियाओकांग के लिए भारत की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है. इनमें से अधिकांश गांव भारत की ओर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, जो भारत में सीमा बलों के बीच चिंता पैदा कर रहे हैं. चीन से संघर्ष की स्थिति में इन क्षेत्रों का उपयोग शिविरों के रूप में किया जा सकता है.
सेना को मिलेगी ताकत
रिपोर्ट में सेना के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है, ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा निर्मित इन मॉडल गांवों में से अधिकांश पर या तो पीएलए द्वारा एलएसी के पास विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मजदूरों या उसके सैनिकों का कब्जा है.’ 
सेना के अधिकारी ने आगे कहा कि अरुणाचल में सीमावर्ती गांवों को पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करना एलएसी पर हमारे (भारत के) प्रभुत्व का दावा करने के लिए वास्तव में आवश्यक था. उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए पिछले कुछ वर्षों में भारत का नागरिक-सैन्य समन्वय “ऐतिहासिक” रहा है.
अरुणाचल प्रदेश में एलएसी के साथ पर्यटन केंद्र
ये पर्यटन केंद्र अरुणाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देंगे और रोजगार के बेहतर अवसरों के लिए सीमावर्ती गांवों से शहरों की ओर युवाओं के पलायन को भी रोकेंगे. रिपोर्ट में लोगों के हवाले से कहा गया है कि होमस्टे, ट्रेक, कैंपिंग साइट, साहसिक खेल गतिविधियों और आध्यात्मिक पर्यटन को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा. 
पूर्वी अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर स्थित पहले गांव कहो और किबिथू के साथ-साथ मेशाई में होमस्टे, कैंपिंग साइटों, ज़िप-लाइनों और ट्रेकिंग मार्गों के सौंदर्यीकरण का काम जोरों पर है. जिन अन्य क्षेत्रों में विकास किया जा रहा है, उनमें अरुणाचल के पूर्वी हिस्से में अंजॉ जिला शामिल है जो मिश्मी और मेयोर जनजातियों का घर है. 
द्वितीय विश्व युद्ध के विमानों के दुर्घटना स्थल का दौरा
रिपोर्ट में लोगों के हवाले से कहा गया है कि पर्यटकों को लुभाने के लिए अरुणाचल प्रदेश की सरकार राज्य में द्वितीय विश्व युद्ध के विमानों के दुर्घटना स्थलों पर पर्यटन को बढ़ावा देने के जिए सक्रिय रूप से विचार कर रही है, जिसकी चीन के साथ 1,129 किलोमीटर (लगभग 701.53 मील) लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है. अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान “द हंप” में लगभग 650 विमान और लगभग 400 वायु सैनिकों को खो दिया था.
Compiled: Legend News

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