भारत ने अक्टूबर में नई दिल्ली और मुंबई में होने वाली आतंकवाद-रोधी समिति की विशेष उच्चस्तरीय बैठक के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद UNSC के सभी सदस्यों को आमंत्रित किया है।
इस बैठक का उद्देश्य आतंकवादियों द्वारा नई तकनीकों का इस्तेमाल किए जाने पर प्रकाश डालना और इस खतरे से प्रभावी ढंग से निपटने के रास्ते तलाशना है।
भारत फिलहाल सुरक्षा परिषद की आतंकवाद-रोधी समिति का अध्यक्ष है और वह अक्टूबर में समिति की विशेष बैठक की मेजबानी करेगा जिसमें अमेरिका, चीन और रूस सहित संयुक्त राष्ट्र के 15 देशों के राजनयिक शामिल होंगे। 
संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा, ''आतंकवादी और हिंसक चरमपंथी प्रचार करने के लिए इंटरनेट व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने सरकारों और तकनीक जगत को समान रूप से चुनौती दी है।''
उन्होंने परिषद को बताया कि भारत आतंकवाद रोधी समिति (सीटीसी) के अध्यक्ष के रूप में 28-29 अक्टूबर को मुंबई और नयी दिल्ली में एक विशेष बैठक की मेजबानी करेगा।
कंबोज ने कहा कि उच्च स्तरीय बैठक में राजनयिक व्यक्तिगत रूप से शरीक होंगे। उन्होंने परिषद के सभी सदस्यों को बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि इस महीने के अंत में सीटीसी अध्यक्ष की तरफ से औपचारिक निमंत्रण जारी किया जाएगा। 
आतंकवादियों को ‘ब्लैकलिस्ट’ करने के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डालना ‘बेहद खेदजनक’ 
इससे पहले भारत ने मंगलवार को चीन की अध्यक्षता में हुई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि ‘यह बेहद खेदजनक’ है कि दुनिया के सबसे कुख्यात आतंकवादियों को ‘ब्लैकलिस्ट’ (काली सूची में डालने) करने के लिए सही और तथ्यपरक प्रस्ताव को डंडे बस्ते में डाल दिया गया।
भारत ने कहा कि इस तरह के ‘‘दोहरे मानदंड’’ ने सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध व्यवस्था की विश्ववसनीयता को ‘सर्वकालिक निम्न स्तर’ पर पहुंचा दिया है।
उल्लेखनीय है कि इस साल के जून में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य और पाकिस्तान के करीबी सहयोगी चीन ने अंतिम समय में भारत और अमेरिका द्वारा पाकिस्तानी आतंकवादी अब्दुल रहमान मक्की को सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति के तहत सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव को रोक दिया था। 
संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कम्बोज ने कहा कि आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने के अनुरोध को बिना स्पष्टीकरण दिए लंबित रखने या बाधित करने की प्रवृत्ति खत्म होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रतिबंध समिति के प्रभावी कार्य के लिए जरूरी है कि वह अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और निष्पक्ष हो। आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने के अनुरोध को बिना सुने और स्पष्टीकरण दिए लंबित रखने या बाधित करते की प्रवृत्ति खत्म होनी चाहिए।’’
‘‘आतंकवादी कृत्यों से अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को खतरा’’ विषय पर चीन की अध्यक्षता में बुलाई गई सुरक्षा परिषद की बैठक में कम्बोज ने कहा, ‘‘यह बहुत खेदजनक है कि दुनिया के सबसे कुख्यात आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने के लिए सही और तथ्य आधारित प्रस्ताव लंबित रखा जा रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘दोहरा मानदंड और राजनीतिकरण के जारी रहने से प्रतिबंध समिति की विश्वसनीयता ‘सर्वकालिक निम्न स्तर’ पर चली गई है। हम उम्मीद करते हैं कि सुरक्षा परिषद के सभी देश तब एक आवाज में बोलेंगे जब अतंरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की बात आएगी।’’ रुचिरा कम्बोज ने कहा कि भारत को आपराधिक गिरोहों के आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने और संयुक्त राष्ट्र द्वारा काली सूची में डाले जाने के बावजूद अपराधियों को पड़ोसी देश में ‘‘सरकारी अतिथि सत्कार’’ मिलने का अनुभव है।
उनका इशारा डी कंपनी के प्रमुख दाऊद इब्राहिम की ओर था, ऐसा माना जाता है कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में है। वह कई अवैध धंधों में लिप्त है तथा 1993 में मुंबई बम धमाकों के बाद वह भारत का सबसे वांछित आतंकवादी बन गया है।
-Compiled by Legend News

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