मथुरा। हिंदी दिवस के अवसर पर राजकीय संग्रहालय में शनिवार को “वर्तमान परिदृश्य में हिंदी की उपयोगिता” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वर्तमान समय में हिंदी भाषा की उपयोगिता, प्रासंगिकता एवं बदलते दौर में इसकी भूमिका पर विचार-विमर्श करना रहा।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. शीला देवी, प्रोफेसर, के.आर. (पी.जी.) कॉलेज, मथुरा ने विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति है। आज हिंदी का दायरा साहित्य और शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासन, पत्रकारिता, संचार, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल मीडिया और विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में भी इसका प्रयोग निरंतर बढ़ रहा है।

 राजकीय संग्रहालय, मथुरा के उप निदेशक श्री योगेश कुमार द्वारा बताया गया कि हिंदी हमारी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हिंदी के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए संस्थाओं के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

कार्यक्रम के अंत में संग्रहालय की सहायक निदेशक डॉ प्रतिभा द्विवेदी द्वारा मुख्य वक्ता डॉ. शीला देवी, अध्यक्ष गिर्राज प्रसाद, विशिष्ट अतिथि डॉ. मांडवी राठौर एवं सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। उन्होंने हिंदी की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी भारत की विविध संस्कृतियों और भावनाओं को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा है। उन्होंने हिंदी को ज्ञान-विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में और अधिक प्रभावी ढंग से स्थापित किए जाने पर भी जोर दिया।
तथा हिंदी भाषा के अधिकाधिक प्रयोग और उसके प्रचार-प्रसार के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों के अतिरिक्त संग्रहालय के प्रशांत श्रीवास्तव, मनीष कुमार, अनितेश वार्ष्णेय, रचना, ज्योति कुशवाहा आदि कार्मिक उपस्थित रहे। व्याख्यान के दौरान उपस्थित लोगों ने हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति एवं भविष्य की संभावनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

- Legend News

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