रिपोर्ट : LegendNews
मोनालिसा को नाबालिग घोषित करने वाला नगर पालिका का आदेश हाईकोर्ट से रद्द
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने महाकुंभ में चर्चित हुई मोनालिसा भोंसले की जन्मतिथि बदलकर उन्हें नाबालिग घोषित करने वाले नगर पालिका के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अधिकारी किसी व्यक्ति की उम्र से जुड़ा इतना बड़ा और गंभीर फैसला उसे सुने बिना नहीं ले सकते। जस्टिस गजेंद्र सिंह ने मोनालिसा के पिता के रुख पर भड़क गए। अदालत ने कहा, "मोनालिसा द्वारा अपनी पसंद से शादी करने के बाद ही उनके पिता ने जमीन-आसमान एक करना शुरू किया।"
हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने महेश्वर के मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा 31 मार्च को जारी उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसके तहत मोनालिसा की पहले दर्ज जन्मतिथि यानी कि एक जनवरी 2008 को बदलकर 30 दिसंबर 2009 कर दिया गया था। पहले के रिकॉर्ड के मुताबिक इस साल 11 मार्च को शादी के वक्त मोनालिसा की उम्र 18 साल थी, लेकिन नगर पालिका के नए आदेश से कागजों पर उसकी उम्र घटकर 16 साल हो गई थी। जिससे वह नाबालिग हो गई।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह तय कर दिया कि कौन सी जन्मतिथि सही है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अधिकारी मोनालिसा को अपनी बात रखने का अवसर देने के बाद उसके पिता के आवेदन पर नए सिरे से विचार करें। इस फैसले से शादी की वैधता या पति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले पर अभी कोई असर नहीं पड़ा है।
कौन है मोनालिसा भोंसले?
प्रयागराज में 2025 में आयोजित महाकुंभ में मालाएं बेचते समय मोनालिसा के वीडियो सोशल मीडिया पर रातों-रात वायरल हो गए थे। इसके बाद उन्हें फिल्मों के ऑफर मिले और वह एक लोकप्रिय सोशल मीडिया पर्सनालिटी बन गईं। बाद में केरल में अभिनेता फरमान खान ने उससे शादी कर ली। इस विवाह के बाद यह मामला उनके परिवार, दो राज्यों की पुलिस और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के बीच बड़े विवाद का कारण बन गया।
कौन सी जन्मतिथि सही?
मोनालिसा और उसके पति की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील विवेक कृष्ण तन्खा और अधिवक्ता जेरी लोपेज ने तर्क दिया कि मई 2015 में जारी आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज थी। इसके अलावा पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और मई 2025 में उसकी मां के हलफनामे पर जारी जन्म प्रमाण पत्र में भी जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 ही थी।
हाईकोर्ट में अपर सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू, अतिरिक्त महाधिवक्ता सोनल गुप्ता और सरकारी वकीलों ने राज्य सरकार का पक्ष रखा। पिता का दावा था कि अस्पताल के पुराने रजिस्टर के अनुसार उसका जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था। उन्होंने तर्क दिया कि माता-पिता के अनुमानित बयान पर बने जन्म प्रमाण पत्र की तुलना में अस्पताल का रिकॉर्ड अधिक पुख्ता सबूत है।
मोनालिसा और उसके पति ने आरोप लगाया कि पिता ने मुस्लिम युवक से विवाह से नाराज होकर और उनके छोटे भाई के जन्म रिकॉर्ड में हेरफेर करके उन्हें जबरन नाबालिग साबित करने की कोशिश की।
जस्टिस गजेंद्र सिंह ने जोरकहा कि उम्र को दो साल पीछे खिसकाने से सिर्फ रजिस्टर की एंट्री नहीं बदलती, बल्कि इससे किसी नागरिक के मतदान का अधिकार, अनुबंध करने की क्षमता, वित्तीय स्वतंत्रता और अपना जीवनसाथी चुनने का मौलिक अधिकार सीधे प्रभावित होता है। इतना ही नहीं इससे उसके साथी पर गंभीर आपराधिक मुकदमे चलने का खतरा बन जाता है। -Legend News

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