रिपोर्ट : LegendNews
UCC का विरोध करने वालों को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने लिया आड़े हाथ
यूनिफॉर्म सिविल कोड UCC के मुद्दे पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने इसका विरोध करने वालों को आड़े हाथों लिया है. राज्यपाल खान ने कहा कि यूसीसी क्या मुस्लिमों से कहता है कि तुम फेरे लगाकर शादी करो? यह समाज को बांटने की कोशिश है. यह एक बड़ा दुष्प्रचार है. एक इंटरव्यू में खान ने कहा कि यह देश विविधताओं का उत्सव मनाता है लेकिन इसके साथ ही हमारी संवैधानिक महत्वाकांक्षा है. ये महत्वाकांक्षा है कि देश में सभी को न्याय की समानता उपलब्ध हो. ये सुनिश्चित करना हर सरकार का धर्म है.
आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि जब 1947 में भारत का बंटवारा हुआ, तो भी इसी तरह की बातों का उपयोग अपना जनमत खड़ा करने के लिए किया गया था. आरिफ खान ने कहा कि मुसलमानों को अपनी ओर करने के लिए कहा गया था कि भारत में मुसलमानों का पर्सनल लॉ, धर्म, भाषा और कल्चर सब खतरे में हैं. मगर पाकिस्तान में 1962 में ट्रिपल तलाक और बहुविवाह पर रोक लगा दी गई. इसी तरह श्रीलंका में मुस्लिमों ने ब्रिटिश राज के कानून को बदलने का आवेदन सरकार को दिया. उन्होंने कहा कि इस तरह के कानूनों से उनका विकास रुक रहा है. जबकि अरब देशों में तो 200 साल से पहले इस दिशा में कदम उठाया गया. आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि ये कहना कि मुसलमानों की ओर से यूसीसी की मांग उठने तक इंतजार किया जाए, सही नहीं है.
खान ने कहा कि पाकिस्तान में सरकार ने ही इसकी पहल की. सभी अरब मुल्कों में सरकार ने पहल की. इस्लाम पूरी दुनिया में एक है. मगर क्या भारत का इस्लाम अलग है? भारत में आंतरिक न्याय की समानता हो. रस्मों-रिवाज की समानता की बात नहीं की जा रही है. न्याय की समानता से भरोसा पैदा होता है. कुरान में कहा गया है कि वक्त के तकाजे के हिसाब से काम करना चाहिए, अन्यथा जिस जगह आप हैं, वहां किसी और को बैठा दिया जाएगा. यूसीसी के चुनावी फायदे के सवाल पर आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि विपक्ष को भी इसका लाभ उठाने के लिए यूसीसी के सिद्धांत का खुलकर समर्थन करना चाहिए. विपक्ष की इस बात को तो समझा जा सकता है कि हम सिद्धांत रूप से सहमत हैं, मगर इसके नियमों को देखना चाहते हैं.
Compiled: Legend News

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