नई द‍िल्ली। Google Cloud कंपनी अब अपने लेटेस्ट AI मॉडल को भारत में मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर पर डिप्लॉय कर रही है, जिससे कंपनियां अपना डेटा और AI प्रोसेसिंग दोनों ही देश के अंदर रख सकेंगी. Google Cloud के चीफ एग्जीक्यूटिव थॉमस कुरियन ने कहा कि यह कदम ग्लोबल क्लाउड कंप्यूटिंग में हो रहे एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है, जहां AI इंफ्रास्ट्रक्चर की लोकेशन भी उतनी ही जरूरी होती जा रही है जितने कि खुद AI मॉडल. गूगल की घोषणा से पता चलता है कि कंपनी भारत में अपने AI का झंडा गाड़ रही है, वह भारत को सिर्फ़ एक बाजार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक AI हब के तौर पर देख रही है.

लोकल होस्टिंग तक पहुंच
भारत दौरे के दौरान इकनॉमिक टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कुरियन ने कहा कि कंपनी अपनी लेटेस्ट AI सुविधाएं ला रही है ताकि भारत में मौजूद मशीनों से सेवा दी जा सके. अब तक, कोई भारतीय कंपनी गूगल क्लाउड के ज़रिए जेमिनी (Gemini) का इस्तेमाल तो कर सकती थी, लेकिन असल AI इन्फरेंस प्रोसेस हमेशा भारत के अंदर ही हो, ऐसा जरूरी नहीं था. कई मामलों में, सर्विस कैसे डिप्लॉय की गई है और मॉडल कहां उपलब्ध है, इसके आधार पर रिक्वेस्ट को किसी दूसरे गूगल क्लाउड रीजन में प्रोसेस किया जा सकता था. कस्टमर भारत में होता था, लेकिन मॉडल जरूरी नहीं कि वहीं चल रहा हो.

कुरियन की घोषणा इस समीकरण को बदल देती है. Google अपने लेटेस्ट जेमिनी मॉडल और AI एजेंट बनाने के लिए अपने प्लेटफ़ॉर्म, जेमिनी एंटरप्राइज़ को भारत में मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर पर लागू कर रहा है. जैसा कि उन्होंने कहा, इसका मकसद भारत में होस्ट किए गए मॉडल और डेटा के साथ लोकल प्रोसेसिंग को सक्षम बनाना है. असल में, इसका मतलब है कि कोई भारतीय बैंक, टेलीकॉम ऑपरेटर, हेल्थकेयर प्रोवाइडर या सरकारी विभाग न केवल अपना डेटा भारत में रख सकता है जैसा कि पहले से होता है बल्कि AI रिक्वेस्ट को विदेश भेजने के बजाय भारत में ही प्रोसेस करवा सकता है.

गूगल ऐसा अभी क्यों कर रहा है?
इसकी मुख्य वजह डिजिटल सॉवरेनिटी (डिजिटल संप्रभुता) का बढ़ता महत्व है. दुनिया भर की सरकारें अब इस बात को लेकर ज्यादा संवेदनशील हो रही हैं कि डेटा कहां स्टोर होता है और AI सिस्टम जानकारी को कहां प्रोसेस करते हैं. रेगुलेटेड सेक्टर (नियमों के दायरे में आने वाले क्षेत्रों) की कंपनियां यह पक्का करना चाहती हैं कि संवेदनशील डेटा कभी भी देश की सीमाओं से बाहर न जाए और AI रिक्वेस्ट को देश के बाहर प्रोसेस न किया जाए. यह बहस तब और तेज हो गई जब देशों ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर को टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क या एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह ही एक रणनीतिक संपत्ति (स्ट्रैटेजिक एसेट) के तौर पर देखना शुरू किया.

कुरियन ने कहा कि गूगल डिजिटल सॉवरेनिटी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बढ़ा रहा है. उन्होंने इस नए कदम को कंपनी की उस सख्त ‘इन-कंट्री मशीन लर्निंग प्रोसेस’ प्रतिबद्धता” का हिस्सा बताया जो उसने भारत से की थी, और कहा कि वे अपने नए मॉडल के ज़रिए इसे पूरा कर रहे हैं.

Google की इन कंपनियों से टक्कर
Google भारत में स्थानीय डेटा रेजिडेंसी की पेशकश करने वाला एकमात्र क्लाउड प्रदाता नहीं है. Microsoft Azure, Amazon Web Services और Oracle Cloud सभी भारत में क्लाउड क्षेत्रों का संचालन करते हैं जो उद्यमों (बिजनेस) को स्थानीय स्तर पर डेटा संग्रहीत (स्टोर) और संसाधित (प्रोसेस) करने की अनुमति देते हैं. वह अपने संबंधित प्लेटफार्मों के जरिए एआई सेवाएं भी प्रदान करते हैं. Microsoft Azure AI और Azure OpenAI के माध्यम से AI सेवाएं प्रदान करता है. AWS अमेज़न बेडरॉक के जरिए फाउंडेशन मॉडल पेश करता है. Oracle ने अपने भारतीय क्लाउड क्षेत्रों के जरिए जेनरेटिव AI सेवाएं उपलब्ध कराई हैं.
- Legend News

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