रिपोर्ट : LegendNews
श्रीकृष्ण-जन्मभूमि पर मनाया गया गीता-जयन्ती महोत्सव, कल सायं शंकराचार्य जी करेंगे प्रसाद वितरण
मथुरा। श्रीकृष्ण-जन्मभूमि पर गीता जयन्ती महोत्सव का भव्य दिव्य आयोजन मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (मोक्षदा एकादशी) तद्नुसार आज सोमवार को भागवत भवन में श्रद्धा और भाव से किया गया।
इस संबंध में जानकारी देते हुऐ श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव श्री कपिल शर्मा ने बताया कि श्रीमद्भगवतगीता जी के पुरोधा भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर गीता-जयन्ती महोत्सव का शुभारम्भ प्रातः 10 बजे मंगल ध्वनि, मंत्रोच्चारण, पुष्पार्चन के साथ हुआ। स्वर्ण मण्डित श्रीमद्भागवत जी के सानिध्य में विराजित श्रीमद्भगवतगीता जी का पूजन, अभिषेक शास्त्रीय मर्यादाओं, वैदिक परंपराओं एवं मान्यताओं के साथ किया गया।
इस दिव्य महोत्सव में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु सम्मिलित हुए, साथ ही देश-विदेश से पधारे हजारों श्रद्धालु भी इस महोत्सव के दर्शन कर धन्य हो उठे। गीता जी के प्रथम छः अध्यायों में कर्म की प्रधानता, मध्य के छः अध्यायों में भक्ति की प्रधानता और अन्त के छः अध्यायों में ज्ञान की व्याख्या की गयी है। सात सौ श्लोकों एवं अठ्ठारह अध्याय को धारण करने वाली श्रीमद्भगवतगीता मात्र एक पुस्तक नहीं है अपितु भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा उच्चारित नादब्रह्म का जीवन्त स्वरूप है। साथ ही कर्म, भक्ति और ज्ञान की एक त्रिवेणी जिसका अवगाहन कर मानव जीवन के परम लक्ष्य और शान्ति की प्राप्ति संभव है। आज अहम की प्रधानता के कारण संपूर्ण विश्व अशान्त और व्याकुल है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में स्पष्ट कहा है कि ममकार के ज्वर से मुक्त हुए बिना मानव जीवन में शान्ति संभव नहीं है और वह श्रीमद्भगवतगीता जी रूपी त्रिवेणी के अवागहन से सहज संभव है।
संस्थान की प्रबंध समिति के सदस्य श्री गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि श्रीमद्भगवतगीता जी जितनी प्रासंगिक महाभारत युद्ध के समय थी आज भी मानवता के लिए उतनी ही प्रासंगिक है। आज संपूर्ण विश्व अशान्त और व्याकुल भाव से जीवन का मार्ग ढूढ़ने का प्रयत्न कर रहा है। श्रीगीता जी के उपदेशों को धारण करके हमें अपने कार्यो का बोध होगा और मार्ग प्राप्ति संभव है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में स्पष्ट कहा है कि अहम के भाव और ममकार के स्वर से मुक्त हुए बिना जीवन में शान्ति संभव नहीं है। निष्काम कर्म, अन्य के विरुद्ध मुखरता और मोह से ऊपर उठकर के कर्तव्यों का पालन एवं कर्म के समय हृदय में ठाकुरजी का भाव बना रहे यही श्रीमद्भगवतगीता जी के श्रवण का प्रसाद है। श्रीमद्भगवत गीता के पुरोधा की जन्मभूमि से गीताजी के सन्देश का प्रसारण निश्चित रूप से मंगलमय राष्ट्र और विश्व के लिए कल्याणकारी होगा।
इस अवसर पर संस्थान के पूजाचार्यों के द्वारा किये गये गीताजी के सस्वर पाठ से संपूर्ण भागवत-भवन गुंजायमान हो उठा। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर पधारे श्रद्धालु गीता के पुरोधा की जन्मभूमि पर उन्हीं की वाणी को सुनकर अभिभूत हो उठे। संस्थान के अधिकारी एवं कर्मचारियों की इस आयोजन में महती भूमिका रही।
कल मंगलवार 02 दिसम्बर को सांयकाल 6 बजे गीता-जयन्ती महोत्सव का मुख्य प्रसाद पीले वस्त्र में श्रीगीता जी की पुस्तक एवं प्रसाद का वितरण परम पूज्य शंकराचार्य श्री श्री विधुशोखर भारती महास्वामी जी महाराज के सानिध्य में किया जायेगा। पूज्य शंकराचार्य जी के दिव्य सानिध्य में श्रीगीता जी के प्रसाद को प्राप्त करने हेतु भक्तों में विशेष उत्साह एवं भाव है।
श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव श्री कपिल शर्मा एवं सदस्य श्री गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, कृष्ण भक्तों एवं गीता के प्रेमियों से ऐसे दिव्य प्रसाद को प्राप्त करने का अनुरोध किया है।
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