फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पेरिस में कहा कि भारत अपनी सामरिक स्वायत्तता से किसी भी स्थिति में समझौता करने के लिए तैयार नहीं होगा। मैक्रों अगले महीने ही भारत आ रहे हैं और उससे पहले उनकी यह बातें अमेरिका के लिए बड़ा इशारा लग रहा है। इस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस तरह से अनियंत्रित तानाशाह बनते दिख रहे हैं, उसमें भारत के लिए उसके पुराने यूरोपीय रणनीतिक सहयोगी से इस तरह का विचार आना बहुत ही महत्वपूर्ण है। 
भारत किसी का दास नहीं बनेगा 
अमेरिका की आक्रामक होती अंतर्राष्ट्रीय नीतियों के बीच इस समय जिस तरह से दुनिया खेमों में बंटती जा रही है, फ्रांस ने दिल खोलकर भारत के रोल का समर्थन किया है। पेरिस में विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने साफ कह दिया है कि भारत जैसा देश 'किसी का दास नहीं बनेगा।' पहलगाम हमले के बाद रणनीतिक तौर पर और ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर भारत ने जो स्टैंड लिया है, उससे उसकी वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ रही है और मैक्रों ने उसी की ओर इशारा करने की कोशिश की है। 
एआई इम्पैक्ट समिट में आएंगे मैक्रों
इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति ने अगले महीने दिल्ली में होने वाली एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होने की हामी भर दी। एक्सपर्ट का कहना है कि इस समिट के माध्यम से भारत को ग्लोबल साउथ की लीडरशिप रोल के लिए अपना एजेंडा सेट करने का मौका मिलेगा। इस शिखर सम्मेलन में ब्राजील के राष्ट्रपति और कनाडा के प्रधानमंत्री भी पहुंच रहे हैं। मतलब, एक तरफ अमेरिका ने जहां खुद को 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर किया है, वहीं प्रमुख वैश्विक संगठनों में भारत की भूमिका बढ़ती जा रही है। 
वैश्विक मंच पर बढ़ती भारत की धमक
इससे पहले फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट से मुलाकात के बाद जयशंकर ने कहा कि भारत यूरोप के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है और इस बात की कोशिश में जुटा है कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और जियो पॉलिटिक्स में किस तरह से अधिक स्थायित्व लाई जा सकती है। इससे पहले उन्होंने बैरोट, पोलैंड के उप प्रधानमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की और जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ पहली भारत-वेइमर फॉर्मेट बैठक में भी हिस्सा लिया। इसके बारे में उन्होंने कहा, 'हमारी चर्चा मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर आधारित थी, भारत-यूरोपीय संघ के रिश्ते, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और यूक्रेन संघर्ष।' 
भारत और यूरोप के रिश्ते में मतबूती
ट्रंप प्रसाशन के अहंकारी रवैए के बीच जब मीडिया ब्रीफिंग में जयशंकर से यह सवाल किया गया कि वे यूरोप में क्यों हैं तो उनका कहना था कि 'यह बहुत सोच-समझकर लिया गया फैसला है, जिसमें यह विश्वास है कि यह रिश्ता वास्तव में आगे बढ़ने और अगले स्तर तक पहुंचने के लिए तैयार है।' पेरिस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश लेकर जब विदेश मंत्री फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों से मिलने पहुंचे तो उन्होंने प्रोटोकोल से आगे बढ़कर उनकी आगवानी की। मतलब, जियो-पॉलिटिक्स में अब यूरोप को भारत की अहमियत का अंदाजा लग चुका है।
-Legend News

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