रिपोर्ट : LegendNews
संसद में अराजकता फैलाने पर पूर्व पीएम देवगौड़ा दुखी, सोनिया गांधी को लिखा पत्र
देश के पूर्व प्रधानमंत्री और राज्यसभा सांसद एच. डी. देवगौड़ा ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा कि संसद और उसके परिसर में मुख्यतः विपक्षी दलों द्वारा बिना सोचे-समझे अराजकता फैलाई गई है, उससे मैं बहुत व्याकुल हूं। मुझे नहीं पता कि आप इस अनियंत्रित गतिविधि और नकारात्मक ऊर्जा के प्रसार के परिणामों को समझ पा रही हैं या नहीं। मुझे ईमानदारी से लगता है कि इससे हमारे लोकतंत्र की नींव को बहुत नुकसान पहुंच सकता है। इस कड़वाहट का एक अमिट निशान छूट सकता है। पहले पत्र न लिखने का कारण यह था कि मुझे लगा कि समय के साथ चीजें शांत हो जाएंगी, लेकिन मुझे खेद है। विपक्ष के सुधार में कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।
देवगौड़ा ने कांग्रेस के प्रदर्शन की निंदा की
देवगौड़ा ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कहा कि हाल के दिनों में संसद में नारेबाजी, तख्तियां दिखाना और गाली-गलौज की घटनाएं अत्यधिक हुई हैं। संसद सत्र के समय यह एक गंभीर जिम्मेदाराना रवैया देखने को मिला है। इससे संसद और संसदीय लोकतंत्र के मेरे मूल विचार और संरचना पर प्रहार किया है। उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष चाहे जितना विरोध करे, लेकिन उसे इस तरह से विरोध करना चाहिए जिससे 75 वर्षों में हमने जो कुछ बनाया है, वह नष्ट न हो।
देवगौड़ा ने नेहरू, पटेल और अब्दुल कलाम को बताया आदर्श
संसदीय लोकतंत्र के मेरे विचार पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, बी.आर. अंबेडकर और मौलाना अब्दुल कलाम आजाद जैसे हमारे संस्थापकों द्वारा दिए गए उपदेशों और मार्गदर्शन पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि मैंने अपने लंबे अनुभव में संसद को हाल ही में देखी गई ऐसी अराजकता और लापरवाही में कभी नहीं देखा। मैं आपको बता दूं, अपने पूरे करियर में, यहां तक कि अत्यधिक उकसावे की स्थिति में भी, मैंने कभी भी राज्य विधानसभा या संसद में विरोध प्रदर्शन करने के लिए सदन के वेल में प्रवेश नहीं किया। यह संस्कृति हमें हमारे लोकतंत्र के वरिष्ठों ने सिखाई है।
देवगौड़ा विरोध के खिलाफ नहीं
एच.डी. देवगौड़ा ने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में संसदीय अव्यवस्था पर चिंता जताई है। देवगौड़ा ने लिखा कि वह संसद में विपक्षी दलों द्वारा पैदा की गई अव्यवस्था और अराजकता से बेहद परेशान हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वे विरोध के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जो पिछले 75 वर्षों में मिलकर बनाई गई व्यवस्था को नष्ट न करे। उन्होंने लिखा कि विपक्ष चाहे जितना विरोध करे, लेकिन उसे इस तरह से विरोध करना चाहिए जिससे 75 वर्षों में हमने जो कुछ बनाया है, वह नष्ट न हो जाए। देवगौड़ा ने लिखा कि मैंने अपने करियर की शुरुआत लोकतांत्रिक संस्थानों के जमीनी स्तर से की थी और अपने जीवन के कुल 65 वर्ष विधायक और सांसद के रूप में बिताए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि मैंने अपने समय का लगभग 90 प्रतिशत विपक्ष की बेंचों पर बिताया है।
-Legend News

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