पाकिस्तान में बलूच विद्रोहियों ने शहबाज-मुनीर को घुटनों पर ला दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक BLA के लड़ाकों ने पाकिस्तान सेना को खदेड़ते हुए कई शिविरों और चौकियों पर कब्जा कर लिया है. 10 से ज्यादा जिलों पर अब BLA का कब्जा है. इसके अलावा अब खबरें आ रही हैं कि पाकिस्तान के ग्वादर में अपने सभी ग्राउंड ऑपरेशन सस्पेंड कर दिए हैं. बलूचिस्तान में लगातार हमलों में चीन के प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाया जा रहा है, जिसे देखते हुए जिनपिंग सरकार ने बड़ा फैसला ले लिया है.
CPEC पर सन्नाटा चीन-पाकिस्तान की बेइज्जती
ग्वादर पोर्ट, जो चीन के CPEC प्रोजेक्ट की रीढ़ था, वहां अब सन्नाटा पसर गया है. बलूच लड़ाकों के बढ़ते हमलों और ‘मजीद ब्रिगेड’ के खौफ ने बीजिंग को हिला कर रख दिया है. चीन ने आधिकारिक तौर पर अपने सभी ग्राउंड ऑपरेशंस सस्पेंड कर दिए हैं. यह पाकिस्तान के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी बेइज्जती है.
इस्लामाबाद के गलियारों में मातम छाया है. पाकिस्तान की ‘अजेय’ कहलाने वाली सेना बलूच लड़ाकों के सामने टिक नहीं पाई. BLA ने पाकिस्तानी सेना को खदेड़ते हुए दर्जनों कैंपों और सामरिक चौकियों पर अपना झंडा फहरा दिया है. खबर है कि अब 10 से ज्यादा जिलों पर पूरी तरह से विद्रोहियों का कंट्रोल है. अपनी ताकत के झूठे किले बनाकर मुनीर ने प्रमोशन पर प्रमोशन तो ले लिए लेकिन दूसरे देशों से जंग तो छोड़ो अपना ही देश बचाने में फेल हो गए. 
लगातार हो रहे आत्मघाती हमलों और बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सैनिकों की लाशों के ढेर ने जिनपिंग सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया है. चीन को समझ आ गया है कि पाकिस्तान अब उसके निवेश को सुरक्षा देने के काबिल नहीं रहा. ग्वादर से चीन का पीछे हटना भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत की तरह देखा जा रहा है.
कैसे टॉर्चर किए जा रहे थे बलूच? 
बता दें कि चीन को खदेड़े जाने के पीछे सालों का टॉर्चर है. चीन ने बलूचिस्तान को तरक्की का सपना दिखाकर वहां के मासूम लोगों की जिंदगी को नर्क बना दिया था. CPEC यानी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा के नाम पर जो खेल खेला गया, उसका सच बहुत ही भयावह है. जिस जमीन पर वहां के लोगों की पुश्तें पली-बढ़ीं, चीन ने उसे एक ‘ओपन एयर जेल’ में तब्दील कर दिया था.
बलूचिस्तान के लोग सदियों से समुद्र के भरोसे अपनी रोजी-रोटी चलाते थे लेकिन चीन के आते ही ग्वादर पोर्ट के पास स्थानीय मछुआरों के जाने पर रोक लगा दी गई.
चीन के विशाल जहाजों ने समुद्र से सारी मछलियां बटोर लीं, जिससे स्थानीय लोग दाने-दाने को मोहताज हो गए. चीन की सुरक्षा के नाम पर पाकिस्तान ने ग्वादर शहर के चारों ओर लोहे की बाड़ लगा दी.
ही शहर में जाने के लिए बलूच लोगों को चीनी और पाकिस्तानी फौज के अपमानजनक चेक-पोस्ट से गुजरना पड़ता था. वहां के बुजुर्गों और महिलाओं को भी हर मोड़ पर तलाशी और पूछताछ का सामना करना पड़ता था, जैसे वे अपने ही घर में अजनबी हों.
CPEC का विरोध करने वाले हर शख्स को ‘गायब’ कर दिया गया. बलूचिस्तान का शायद ही कोई ऐसा घर हो जिसका कोई बेटा या भाई गायब न हुआ हो. विरोध करने वालों को उठाकर ले जाया जाता था और महीनों बाद उनकी क्षत-विक्षत लाशें सड़क किनारे मिलती थीं.
चीन के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स भारी बिजली का इस्तेमाल करते थे, जबकि वहां के गांवों में लोग आज भी मोमबत्ती जलाने पर मजबूर हैं. पोर्ट के लिए पानी के सारे स्रोत मोड़ दिए गए, जिससे आम जनता के लिए पीने के पानी का भी अकाल पड़ गया. 
-Legend News

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