वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी ) की ताबड़तोड़ रेड पड़ी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फेमा के नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले में कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अचानक शुरू की गई इस कार्रवाई से बिजनेस सेक्टर में खलबली मच गई है। निवेशकों की नजर अब कंपनी के शेयर पर भी टिकी होंगी, क्योंकि इतनी बड़ी खबर के बाद एक बड़ा एक्शन मार्केट में भी देखने को मिल सकता है। बता दें कि फेमा अधिनियम का मुख्य उद्देश्य भारत में विदेशी मुद्रा के लेन-देन पर निगरानी रखना होता है। 
इस पूरे मामले पर वेदांता के प्रवक्ता ने ईडी की कार्रवाई के बारे में बताते हुए कहा कि कंपनी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और उनसे मांगी गई सभी जानकारी दे रही है। उन्होंने ये भी साफ किया कि कंपनी सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन करेगी। साथ ही प्रवक्ता ने कहा कि मामला फिलहाल अभी प्रोसेस में है इसलिए इस समय वो इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकते।
इस खबर के बाहर आते ही शेयर बाजार में भी हलचल तेज हो गई है और निवेशकों की नजरें कंपनी के अगले कदम पर टिकी हैं. कंपनी के शेयर की बात करें तो 0.64% की तेजी के साथ 339.30 पर ट्रेड कर रहा है.
दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की हो रही जांच
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ईडी की टीमें मंगलवार सुबह ही वेदांता समूह से जुड़े परिसर पर पहुंच गईं। अधिकारियों के अनुसार ये तलाशी अभियान फेमा के नियमों के उल्लंघन के आरोपों के तहत चलाया जा रहा है। फिलहाल, ईडी के अधिकारी दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों को खंगाल रहे हैं और कार्रवाई अभी भी जारी है।
ईडी FEMA के तहत कब एक्शन लेता है
ईडी FEMA के तहत तब एक्शन लेता है जब उसे किसी कंपनी या व्यक्ति के द्वारा विदेशी मुद्रा लेनदेन में उल्लंघन का संदेह होता है। इसमें अधिकतर ऐसे मामले शामिल होते हैं जैसे अवैध रूप से विदेश में धन हस्तांतरण करना, हवाला, विदेश में अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करना, या विदेशी निवेश से संबंधित नियमों का पालन न करना। 
वेदांता ग्रुप किस सेक्टर में कारोबार करता है
वेदांता भारत की सबसे बड़ी प्राथमिक एल्युमिनियम उत्पादक कंपनी है। इसके अलावा भारत की कुल जिंक जरूरत का लगभग 81% उत्पादन इसी ग्रुप द्वारा किया जाता है। कंपनी केयर्न इंडिया की मदद से कच्चे तेल का उत्पादन करती है। वेदांता ग्रुप ने भारत में अगले कुछ सालों में लगभग ₹2 लाख करोड़ का भारी निवेश करने की योजना बनाई है।
पहले भी जांच के दायरे में आ चुका है वेदांता ग्रुप
बता दें कि वेदांता ग्रुप पहले भी साल 2004 में यह समूह पहले भी विदेशी मुद्रा मामलों में नियामक जांच के दायरे में आ चुका है। 2004 में, प्रवर्तन निदेशालय ने स्टरलाइट इंडस्ट्रीज और उसके तीन प्रमोटर निदेशकों को एफईआरए और फेमा के नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया था और कंपनी तथा उसके निदेशकों पर जुर्माना लगाया था। 
-Legend News

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