पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले ‘मतदाता सूची’ से नाम हटाये जाने के मामले की देश की सर्वोच्च अदालत में सुनवाई हुई. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आये. निर्वाचन आयोग (ECI) ने कोर्ट को बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत हटाये गये मतदाताओं के 60 लाख दावों में से करीब 59 लाख का निपटारा सोमवार दोपहर तक ही कर दिया गया.
मैराथन सुनवाई : जजों ने दिन-रात एक कर सुनाया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर से भेजे गये एक पत्र का हवाला देते हुए न्यायिक अधिकारियों (जजों) की कार्य की प्रगति की सराहना की. इसमें कहा गया है कि सोमवार दोपहर तक 59 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों पर निर्णय लिया जा चुका था.
देर रात तक सभी मामलों पर हो जायेगा फैसला
चुनाव आयोग ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि शेष बचे सभी दावों पर आज यानी सोमवार देर रात तक ही अंतिम फैसला ले लिया जायेगा. सुप्रीम कोर्ट को बताया गया है कि मालदा जिले में, जहां से पिछले दिनों जजों को बंधक बनाये जाने की खबरें आयीं थीं, वहां भी न्यायिक अधिकारियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए लगभग 8 लाख दावों का निपटारा कर दिया है. 
ममता बनर्जी के वकील ने ट्रिब्यूनल पर उठाये सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में मतदाताओं के दावों के निपटारे की रफ्तार पर संतोष जताया, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वकील ने एक गंभीर मुद्दा उठा दिया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई के लिए जो 19 विशेष न्यायाधिकरण (Tribunals) गठित किये गये थे, वे अभी तक सुचारु रूप से काम शुरू नहीं कर पाये हैं. इससे उन लोगों को परेशानी हो रही है, जो अपने नाम कटने को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ना चाहते हैं. 
क्या है पूरा विवाद?
पश्चिम बंगाल में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच मतदाता सूची में ‘घुसपैठियों’ बनाम ‘वैध नागरिकों’ के नाम काटने के मुद्दे पर ठन गयी है. SIR प्रक्रिया के तहत लाखों नाम हटाये जाने के बाद पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये थे. अब सुप्रीम कोर्ट की इस सक्रियता के बाद उम्मीद जतायी जा रही है कि नामांकन की आखिरी तारीख से पहले मतदाता सूची का विवाद सुलझ जायेगा. 
-Legend News

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