रिपोर्ट : LegendNews
ज्ञान, भक्ति तथा प्रेम के मूर्तिमान स्वरूप थे डॉ. शिवकरण पाण्डेय महाराज
वृन्दावन। आनन्द वाटिका क्षेत्र स्थित कल्पतरु आश्रम में संस्कृत के प्रकांड विद्वान, श्रीमद्भागवत सार्वभौम सम्राट डॉ. शिवकरण पाण्डेय महाराज के जन्मोत्सव के अवसर पर सद्गुरुदेव भगवानवतरण महोत्सव अत्यन्त श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ सम्पन्न हुआ। सर्वप्रथम समस्त शिष्य परिकर के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य स्वर्गीय डॉ. शिवकरण पाण्डेय महाराज के चित्रपट का पूजन-अर्चन किया गया।तत्पश्चात श्रीहनुमद् आराधन मण्डल के तत्वावधान में सुन्दर काण्ड का संगीतमय सामूहिक पाठ हुआ।
इस अवसर पर आयोजित वृहद सन्त-विद्वत सम्मेलन में अपने विचार व्यक्त करते हुए अघोर शक्ति पीठाधीस्वर स्वामी बाल योगेस्वरानंद महाराज एवं श्रीरंगलक्ष्मी संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामसुदर्शन मिश्र ने कहा कि गोलोकवासी डॉ. शिवकरण पाण्डेय की सादगी, सहजता, सरलता और उनके मृदुल व्यवहार की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है।वो अत्यंत मृदुभाषी और प्रसन्न चित्त थे।
प्रख्यात साहित्यकार "यूपी रत्न" डॉ. गोपाल चतुर्वेदी एवं पुराणाचार्य डॉ. मनोज मोहन शास्त्री ने कहा कि गोलोकवासी डॉ. शिवकरण पाण्डेय को रामानुज संप्रदाय के होते हुए भी सभी संप्रदायों के व्यक्तियों के द्वारा सम्मान प्राप्त था।नाम, रूप, लीला, धाम में उनकी पूर्ण निष्ठा थी।साथ ही ब्रज से उनका अपार प्रेम था।
महोत्सव के संयोजक आचार्य नेत्रपाल शास्त्री एवं धर्म पथिक आचार्य शैलेन्द्र कृष्ण शास्त्री महाराज ने कहा कि हमारे सद्गुरदेव गोलोकवासी डॉ. शिवकरण पाण्डेय ज्ञान, भक्ति तथा प्रेम के मूर्तिमान स्वरूप थे।उन्हें अनेकों ग्रंथ कंठस्थ थे।
चतु:संप्रदाय के श्रीमहंत फूलडोल बिहारीदास महाराज एवं ब्रजभूमि कल्याण परिषद् के अध्यक्ष पण्डित बिहारीलाल वसिष्ठ ने कहा कि गोलोकवासी डॉ. शिवकरण पाण्डेय के त्याग, परिश्रम, भागवत की शिक्षा, व ज्ञान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। उनके विषय में कुछ भी कहना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है।
सन्त सम्मेलन में संस्कृत के वयोवृद्ध विद्वान पण्डित राजाराम मिश्र (गुरुजी), आचार्य शिवम साधक महाराज, संत रामदास महाराज, भागवताचार्य विमल कृष्ण पाठक, पण्डित आर.एन. द्विवेदी (राजू भैया) आचार्य रामविलास चतुर्वेदी, सन्त रामसंजीवन दास शास्त्री, आचार्य विपिन बापू महाराज, आचार्य डॉ. ऋषि तिवारी, अंकित कृष्ण महाराज, पं. सच्चिदानंद द्विवेदी (भैयाजी), डॉ. रामदत्त मिश्र, आशीष कृष्ण शास्त्री, आचार्य गणेश उपाध्याय, गोविंद बल्लभ शर्मा, प्रशांत मिश्रा, कृष्ण अवस्थी, सौरभ शर्मा, अरुण ओझा, नमामि पांडेय, आदित्य पांडेय, दीपक पांडेय, शशांक पांडेय, आचार्य राजू पांडेय, अनुराग तिवारी, आचार्य ऋतिक दीक्षित, चंचल प्रपन्नाचार्य महाराज, अनीकेत शास्त्री, साध्वी अदिति चतुर्वेदी, साध्वी अंजना, साध्वी कल्पना, सुनेना, साध्वी माधवी, चारु, हेमंत, सीताराम, कृष्ण प्रपन्नाचार्य महाराज, पण्डित ईश्वरचन्द्र रावत, साध्वी कौशिकी, सुकेंद्र मिश्रा, सुख सिंधु आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।संचालन एवं आभार व्यक्त महोत्सव के संयोजक नेत्रपाल शास्त्री ने किया।
महोत्सव का समापन बटुक जन, विशिष्ट महंत, विद्वतजन एवं महानुभावों के भोजन प्रसाद के साथ हुआ।
- Legend News

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