मथुरा। भावनात्मक बुद्धिमत्ता वह क्षमता है जिसके द्वारा आप अपनी भावनाओं को व्यक्त और प्रबंधित कर सकते हैं तथा दूसरों की भावनाओं के प्रति उचित प्रतिक्रिया दे सकते हैं। इसे कभी-कभी "आपका भावनात्मक भागफल" भी कहा जाता है। आपसी संबंधों में उच्च भावनात्मक बुद्धिमत्ता आपको प्रभावी ढंग से संघर्षों को सुलझाने, दूसरों के सामने अपनी जरूरतें व्यक्त करने तथा सीमाएं निर्धारित करने में सक्षम बनाती है। यह बातें अतिथि वक्ता डॉ. बबिता भाटी ने राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट मथुरा के एमबीए द्वितीय तथा चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं को बताईं।

संस्थान द्वारा ‘इमोशनल इंटेलिजेंस’ विषय पर आयोजित अतिथि व्याख्यान में ग्रेटर नोएडा से आईं मुख्य वक्ता डॉ. बबिता भाटी ने विद्यार्थियों को भावनात्मक बुद्धिमत्ता के महत्व, व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में इसके प्रभाव तथा नेतृत्व क्षमता के विकास में इसकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी युग में तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ भावनात्मक संतुलन, आत्म-जागरूकता तथा प्रभावी संवाद कौशल सफलता के महत्वपूर्ण आधार हैं।

व्याख्यान के दौरान डॉ. बबिता भाटी ने छात्र-छात्राओं को बताया कि पेशेवर परिवेश में निर्णय लेने, समस्याओं को हल करने तथा एक साझा लक्ष्य की ओर टीम के रूप में काम करने के लिए भावनात्मक बुद्धिमत्ता आवश्यक है। ये सभी कामकाजी जीवन के मूलभूत पहलू हैं। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने अतिथि वक्ता से भावनात्मक बुद्धिमत्ता से सम्बन्धित कई प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. भाटी ने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समाधान किया। अतिथि व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा।

संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए उनके बहुमूल्य मार्गदर्शन एवं विद्यार्थियों के साथ साझा किए गए अनुभवों की मुक्तकंठ से तारीफ की। व्याख्यान के अंत में कॉर्पोरेट रिसोर्स सेंटर के प्रमुख डॉ. विकास जैन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य वक्ता तथा प्रबंधन के संकाय सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास एवं पेशेवर दक्षताओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

संस्थान के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, उपाध्यक्ष पंकज अग्रवाल तथा प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने इमोशनल इंटेलिजेंस व्याख्यान की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु इस प्रकार के ज्ञानवर्धक आयोजनों का निरंतर आयोजन किया जाना जरूरी है। डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने कहा कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता के लिए अपनी भावनाओं को समझना और दूसरों की भावनाओं के प्रति उचित प्रतिक्रिया देना आवश्यक है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि उच्च भावनात्मक बुद्धिमत्ता वाले लोगों में अन्य लोगों से कई तरह के भिन्न गुण होते हैं। छात्र-छात्राएं यदि अपनी भावनात्मक बुद्धिमत्ता को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो ऐसे कई तरीके हैं जिनसे वे अपने जीवन में इन गुणों को विकसित और निखार सकते हैं।
-Legend News

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