दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली दंगों की साजिश मामले में आरोपी शरजील इमाम के खिलाफ आरोप तय करने पर दलीलें सुनीं। शरजील इमाम के वकील ने दलील दी कि उनके खिलाफ कोई साजिश का मामला नहीं बनता, क्योंकि कोई आपसी सहमति नहीं थी, और सह-आरोपियों के साथ कोई चैट या फोन पर बात नहीं हुई थी। यह भी दलील दी कि उन्होंने खुद अपने कथित गुरु उमर खालिद से बात नहीं की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
उमर खालिद मेरे मार्गदर्शक नहींः शरजील इमाम
शरजील इमाम ने गुरुवार को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट के सामने इस आरोप का खंडन किया कि उमर खालिद उनके 'मार्गदर्शक' थे। उन्होंने यह भी कहा कि 2020 के नॉर्थ- ईस्ट दिल्ली दंगों के दौरान हुई हिंसा में दोनों के बीच कोई समन्वय नहीं था। वकील तालिब मुस्तफा ने ASJ समीर बाजपेयी के समक्ष इमाम की ओर से यह दलील पेश की। उन्होंने दंगों की साजिश रचने के आरोप में UAPA के तहत अपने मुवक्किल के खिलाफ आरोप तय किए जाने का विरोध किया।
कोई साजिश का मामला नहीं बनताःवकील की दलील
एडिशनल सेशंस जज (ASJ) समीर बाजपेयी ने शरजील इमाम की ओर से उनके वकील अहमद इब्राहिम की दलीलें सुनीं। वकील ने दलील दी कि जहां तक शरजील इमाम का सवाल है, कोई साजिश का मामला नहीं है।चार्जशीट में शामिल चैट्स से मेरा (शरजील का) कोई लेना-देना नहीं है। ऐसी कोई चैट नहीं है जो शरजील को किसी सह-आरोपी से जोड़ती हो, किसी सह-आरोपी से कोई कॉल नहीं हुई। पूरा मामला WhatsApp चैट्स पर आधारित है। शरजील इमाम का दंगों में कोई हाथ नहीं था। वकील ने कहा कि शरजील पर दंगों की साजिश में भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है।
भाषण और हिंसा के बीच कोई लिंक नहींः शरजील इमाम की दलील
वकील ने कहा कि आरोप है कि शरजील ने CAA के भेदभाव वाले नेचर का विरोध करने वाले पर्चे बांटे थे। बहस के दौरान, वकील ने कहा कि 13 दिसंबर, 2019 को एक भाषण हुआ था। मैं उस मामले में मुकदमे का सामना कर रहा हूं। कथित तौर पर इससे 15 दिसंबर को कुछ हिंसा हुई। भाषण और हिंसा के बीच कोई लिंक नहीं है। वकील ने कहा कि शरजील इमाम हमारे फेसबुक पोस्ट में बताए गए कारणों से शाहीन बाग विरोध स्थल से चले गए थे। उन्होंने राजनीतिक पार्टियों के बयानों को देखते हुए जगह खाली कर दी और शाहीन बाग साइट छोड़ दी। वकील ने आगे कहा कि उनके धरना स्थल छोड़ने के बाद कोई हिंसा नहीं हुई।
अपने तर्क में शरजील ने यह बात भी कही
आगे यह तर्क दिया गया कि 3 जनवरी से 13 जनवरी तक वह किसी भी विरोध स्थल पर नहीं गए। उसके बाद, मैं (शरजील) अलीगढ़ गया। वहां एक भाषण हुआ, लेकिन विरोध के लिए कोई आह्वान नहीं किया गया था। उसके बाद, मैं पश्चिम बंगाल, बिहार गया। अलीगढ़, बंगाल और बिहार में मेरे भाषणों के बाद कोई हिंसा नहीं हुई। वकील ने कहा कि मैं भाषणों के लिए मुकदमे का सामना कर रहा हूं।
28 जनवरी 2020 को गिरफ्तारी
शरजील को 28 जनवरी, 2020 को गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि डोनाल्ड ट्रंप भारत आने वाले थे। वे कुछ बड़ा करने की योजना बना रहे थे ताकि भारत को बदनाम किया जा सके। वकील ने कहा, आरोप है कि साजिशकर्ताओं को 14 जनवरी से पता था कि ट्रंप भारत आ रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक शेड्यूल 11 फरवरी को आया। 
मुझे टॉप साजिशकर्ता नहीं कहा गया हैः शरजील इमाम
वकील ने दलील दी, 'शरजील इमाम 28 जनवरी से जेल में हैं। इसलिए, मैं 11 फरवरी के बाद हुई किसी भी चीज से जुड़ा नहीं हूं।' आरोप है कि 11 फरवरी के बाद योजना बदल दी गई थी। वकील ने कहा, 'मैं (शरजील) किसी भी ऐसी मीटिंग या चर्चा का हिस्सा नहीं था जिससे कोई हिंसा हुई हो। मैं राष्ट्रपति ट्रंप की यात्रा के दौरान क्या करना है, इस बारे में चर्चा का हिस्सा नहीं था। मुझे टॉप साजिशकर्ता नहीं कहा गया है।'
-Legend News

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