रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को अत्याधुनिक डीपीएसयू भवन का उद्घाटन किया और आत्मनिर्भरता तथा सहयोग की भावना को सशक्त बनाने के उद्देश्य से रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (Defence PSUs) के बीच तीन महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर हुए हस्ताक्षरों की अध्यक्षता की।
इस अवसर पर उन्होंने चार रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों को मिनीरत्न का दर्जा प्राप्त होने पर सम्मानित भी किया।
कार्यक्रम के दौरान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) के साथ दो एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों का उद्देश्य YIL के आधुनिकीकरण को सहयोग देना और 10,000 टन क्षमता वाले फॉर्जिंग प्रेस संयंत्र की स्थापना करना है, जो रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों में उपयोग होने वाले एल्युमिनियम अलॉय की आयात निर्भरता को कम करने की दिशा में अहम कदम है। HAL ने YIL को 435 करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त अग्रिम देने की प्रतिबद्धता जताई है जबकि BDL अगले दस वर्षों में 3,000 मीट्रिक टन तक के सतत कार्यभार की आपूर्ति करेगा।
तीसरा एमओयू एमआईडीएचएएनआई (MIDHANI) में मेटल बैंक की स्थापना के लिए किया गया, ताकि राष्ट्रीय महत्व की रक्षा परियोजनाओं के लिए आवश्यक कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर कई आरएंडडी (R&D) पहल भी शुरू कीं, जिनमें HAL R&D मैनुअल प्रमुख है। इसका उद्देश्य अनुसंधान और विकास तंत्र को डिजिटलीकरण, बौद्धिक संपदा सृजन और भारतीय शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग के माध्यम से मजबूत करना है। डीपीएसयू का आरएंडडी रोडमैप मौजूदा और भविष्य की रणनीतियों को एकीकृत करता है, जिससे लाइसेंस आधारित उत्पादन से स्वदेशी डिजाइन और विकास की दिशा में बदलाव संभव हो सके — यह रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
सतत और हरित रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राजनाथ सिंह ने SWAYAM (Sustainable and Green Defence Manufacturing) पहल की शुरुआत की। यह एक व्यापक दस्तावेज है जो डीपीएसयू में हो रहे ग्रीन ट्रांजिशन को दर्शाता है। Comprehensive Energy Efficiency Action Plan (CEEAP) 2023 पर आधारित SWAYAM में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने के उपायों का विवरण दिया गया है। SWARNA डैशबोर्ड और DPSU Efficiency Index जैसे डिजिटल टूल्स से सशक्त यह पहल, स्थिरता और आत्मनिर्भरता को जोड़ने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
रक्षा मंत्री ने नव उद्घाटित डीपीएसयू भवन, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, नौरोजी नगर में सभी रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों की व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता भी की।
बैठक में चार डीपीएसयू — म्यूनिशन इंडिया लिमिटेड (MIL), आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL), इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL) और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) — को मिनीरत्न (श्रेणी-I) का दर्जा मिलने पर सम्मानित किया गया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि मिनीरत्न का दर्जा मिलने से इन उपक्रमों को क्षमता विस्तार, आधुनिकीकरण और नए उपक्रमों व साझेदारियों — चाहे सार्वजनिक हों या निजी — के साथ संयुक्त उपक्रम या विलय करने की स्वतंत्रता मिलेगी।
सभा को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, हमारे सभी 16 डीपीएसयू देश की आत्मनिर्भरता के मजबूत स्तंभ हैं। ऑपरेशन सिंदूर जैसी अभियानों में उनकी उत्कृष्ट भूमिका हमारे स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स की विश्वसनीयता और क्षमता का प्रमाण है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में भारत ने 1.51 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन हासिल किया, जिसमें डीपीएसयू का योगदान 71.6 प्रतिशत रहा। रक्षा निर्यात 6,695 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादों पर वैश्विक भरोसे का प्रतीक है।
रक्षा मंत्री ने सभी डीपीएसयू से अपील की कि वे महत्वपूर्ण तकनीकों के तीव्र स्वदेशीकरण, समग्र आरएंडडी, उत्पाद गुणवत्ता सुधार, समयबद्ध डिलीवरी और निर्यात वृद्धि पर ध्यान दें। उन्होंने निर्देश दिया कि डीपीएसयू स्पष्ट आरएंडडी और इंडिजेनाइजेशन रोडमैप तैयार करें, जिनके परिणाम अगले समीक्षा बैठक में प्रस्तुत किए जाएं।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) को 100 प्रतिशत हरित ऊर्जा उपयोग प्राप्त करने पर सम्मानित किया। IOL ने सितम्बर 2025 से पूर्ण रूप से नवीकरणीय ऊर्जा अपनाकर 8,669 टन CO₂ उत्सर्जन घटाया और FY 2025-26 की पहली तिमाही में 26.36 लाख रुपये की बचत की। वहीं BEL जनवरी 2025 में RE100 लक्ष्य हासिल करने वाला पहला नवरत्न उपक्रम बना, जिसने अपने स्कोप-2 उत्सर्जन को 15,000 मीट्रिक टन से घटाकर शून्य कर दिया — जो इसके नेट-ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। 
-Legend News

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