रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि देश में ही रक्षा उपकरणों के उत्पादन में आए जबरदस्त उछाल के दम पर भारत तेजी से एक भरोसेमंद वैश्विक सुरक्षा साझेदार के तौर पर उभर रहा है और हिंद महासागर से लेकर हिंद-प्रशांत तक अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ा रहा है। एक कार्यक्रम में पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए सिंह ने कहा कि नई दिल्ली ने आतंकवाद पर अपना नजरिया पूरी दुनिया के सामने साफ तौर पर रखा है और साथ ही कहा कि ''आतंकवाद के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं करने का नजरिया हमारे लिए सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि कार्रवाई की एक नीति है।
पूरी दुनिया ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत की ताकत देखी 
उन्होंने कहा, ''हम आतंकवाद के खिलाफ सिर्फ उसकी दहलीज पर ही नहीं, बल्कि उसके घर में घुसकर भी कार्रवाई करेंगे। पूरी दुनिया ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान यह देखा था।'' रक्षा मंत्री ने स्वदेशी रक्षा निर्माण में भारत की सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में बने रक्षा उत्पादों का निर्यात लगभग 100 देशों को किया जा रहा है और देश के रक्षा उत्पादन का कुल मूल्य सालाना लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
दुनिया के लिए एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार बन रहा भारत 
उन्होंने कहा, ''आज भारत न केवल अपने लिए रक्षा उपकरण बना रहा है, बल्कि दुनिया के लिए एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार भी बन रहा है। हिंद महासागर से लेकर हिंद-प्रशांत तक, भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।'' रक्षा मंत्री ने कहा कि देश 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने के लिये अच्छी स्थिति में है। उन्होंने कहा, ''अगर कोई देश हथियारों, गोला-बारूद, नौवहन प्रणाली, मिसाइलों, रडार और ड्रोन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता है, तो उसकी रणनीतिक और सैन्य स्वायत्तता भी सीमित हो जाती है। हम इसे पूरी तरह से बदलने के पक्के इरादे के साथ काम कर रहे हैं।
रक्षा औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना सरकार का बड़ा कदम 
सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता भारत के उद्योगों में भरोसे का सबूत है। रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत को मजबूत करने की दिशा में मोदी सरकार ने जो ''सबसे बड़ा कदम'' उठाया है, वह रक्षा औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा, ''रक्षा क्षेत्र में भारत को मजबूत बनाने का हमारा नजरिया भारत की क्षमताओं पर भरोसा करने वाला है। लेकिन पिछली सरकारों का नजरिया भारत की क्षमता और काबिलियत को लेकर कुछ हद तक शक वाला था। शायद उन्हें भारत की क्षमताओं पर उतना भरोसा नहीं था, जितना हमारी सरकार को है। 
-Legend News

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