नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए पिछला 24 घंटा किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा. सोमवार को जो कच्चा तेल $119.50 प्रति बैरल के उच्चतम स्तर पर पहुँचकर दुनिया को डरा रहा था, वह मंगलवार सुबह होते-होते धड़ाम से गिरकर $92 के करीब आ गया. महज कुछ घंटों के भीतर कीमतों में करीब 6.6% की यह भारी गिरावट वैश्विक राजनीति में आए बड़े बदलावों का नतीजा है.

तेल की कीमतों को नीचे लाने में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ट्रंप की फोन पर हुई बातचीत का भी बड़ा हाथ है. मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का वह बयान रहा, जिसने बाजार की अनिश्चितता को कम कर दिया. ट्रम्प ने संकेत दिए कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है. जैसे ही निवेशकों को लगा कि युद्ध का खतरा टल रहा है, उन्होंने ऊंचे दामों पर बिकवाली शुरू कर दी.

इसके अलावा, क्रेमलिन (रूस) की ओर से आई एक खबर ने आग में घी का काम किया. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच फोन पर हुई बातचीत में युद्ध को तेजी से खत्म करने के सुझाव साझा किए गए. ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में यहाँ तक कह दिया कि ईरान के खिलाफ युद्ध लगभग खत्म हो चुका है.

ईरान की धमकी और G-7 की रणनीति
एक तरफ जहाँ शांति की खबरें आईं, वहीं ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि यदि हमले नहीं रुके, तो वे इस क्षेत्र से एक लीटर तेल भी निर्यात नहीं होने देंगे. हालांकि, बाजार ने इस धमकी को नजरअंदाज कर दिया क्योंकि अमेरिका और G-7 देश अपने 'इमरजेंसी ऑयल रिजर्व' (SPR) से लाखों बैरल तेल बाजार में छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं. साथ ही, ट्रम्प प्रशासन रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों में ढील देने पर भी विचार कर रहा है, ताकि दुनिया में तेल की कमी न हो.
- Legend News

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