अनिल अग्रवाल के वेदांता ग्रुप के लिए बड़ी राहत की खबर है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL Ratings) ने ग्रुप के डिमर्जर (कंपनी के अलग-अलग हिस्सों में बंटने) के बाद वेदांता लिमिडेट, वेदांता एल्युमीनियम लिमिडेट और वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड की क्रेडिट रेटिंग अपग्रेड कर दी है। एजेंसी का कहना है कि डिमर्जर के बाद इन कंपनियों की कारोबारी और वित्तीय स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत हुई है। 
किस कंपनी की रेटिंग कितनी बढ़ी?
वेदांता लिमिटेड ( Vedanta Ltd ): इसकी लॉन्ग-टर्म रेटिंग को 'CRISIL AA' से बढ़ाकर 'CRISIL AA+/Stable' कर दिया गया है। वहीं शॉर्ट-टर्म रेटिंग CRISIL A1+ पर बरकरार रखी गई है।
वेदांता एल्युमीनियम ( Vedanta Aluminium Metal Ltd ): इसकी भी लॉन्ग-टर्म रेटिंग बढ़कर अब 'CRISIL AA+/Stable' हो गई है। शॉर्ट-टर्म रेटिंग CRISIL A1+ पर बरकरार रखी गई है।
वेदांता ऑयल एंड गैस ( Vedanta Oil and Gas Ltd ): इसकी रेटिंग में सबसे बड़ा सुधार हुआ है। यह सीधे 'CRISIL A+/Watch Developing' से छलांग लगाकर 'CRISIL AA+/Stable' पर पहुंच गई है। यह तीनों कंपनियों में सबसे बड़ा रेटिंग अपग्रेड माना जा रहा है।
नोट: रेटिंग में 'AA+' मिलने का मतलब है कि कंपनी को कर्ज चुकाने के मामले में बहुत सुरक्षित और मजबूत माना जा रहा है।
रेटिंग बढ़ने के बड़े कारण
1. वेदांता लिमिटेड
क्रिसिल के मुताबिक कंपनियों के अलग होने के बाद भी वेदांता लिमिटेड को हिंदुस्तान जिंक (HZL) का पूरा साथ मिल रहा है।
साल 2026 में वेदांता की कुल कमाई का 95% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ हिंदुस्तान जिंक से आया है।
चूंकि हिंदुस्तान जिंक बहुत कम खर्च में भारी मुनाफा कमाने वाली कंपनी है, इसलिए वेदांता की पैसों की स्थिति बहुत मजबूत हो गई है और उसका कर्ज का बोझ भी काफी कम हुआ है।
2. वेदांता एल्युमीनियम
भारत के एल्युमीनियम बाजार में इस कंपनी की स्थिति बेहद मजबूत है।
कंपनी बहुत ही कुशल तरीके से काम कर रही है जिससे उसका मुनाफा लगातार बढ़ रहा है। आने वाले समय में भी इसके और बेहतर होने की उम्मीद है।
इसके साथ बालको (BALCO) कंपनी के जुड़े रहने से इसे और ताकत मिल रही है।
3. वेदांता ऑयल एंड गैस
ग्रुप के अलग होने के बाद वेदांता का पूरा तेल और गैस का बिजनेस अब इसी कंपनी के पास आ गया है।
यह भारत में प्राइवेट सेक्टर की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनियों में से एक है, जो हर दिन लगभग 87 हजार बैरल तेल (या उसके बराबर गैस) निकालती है।
इसका 80% से ज्यादा काम राजस्थान से होता है, जहां तेल निकालने का खर्च काफी कम आता है। 
-Legend News

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