भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का कैंसर से लंबी जंग के बाद निधन हो गया. यह खबर रिंकू और उनके परिवार के लिए गहरा सदमा लेकर आई है. रिंकू का क्रिकेट सफर भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है, जिसमें उनके पिता हमेशा भावनात्मक रूप से उनके साथ खड़े रहे. अलीगढ़ के रहने वाले बाएं हाथ के बल्लेबाज़ रिंकू सिंह के लिए सफलता की राह आसान नहीं थी. उनके करियर के बीच में चोट की समस्या आई और साल 2019 में बीसीसीआई द्वारा अबू धाबी में एक टी20 टूर्नामेंट में खेलने के कारण तीन महीने का निलंबन भी झेलना पड़ा. इन चुनौतियों के बावजूद रिंकू ने घरेलू क्रिकेट में उत्तर प्रदेश के लिए लगातार रन बनाए और धीरे-धीरे अपनी पहचान मजबूत की.
रिंकू ने एक वीडियो में बताया था कि उनके करियर के पिछले पांच साल बेहद चुनौतीपूर्ण रहे. चोट के दौरान वह लंबे समय तक मैदान से दूर रहे, जिससे वह खुद भी निराश थे. उन्होंने भावुक होकर कहा था कि जब उनके पिता को चोट की खबर मिली, तो उन्होंने 2–3 दिन तक खाना नहीं खाया. 
रिंकू ने उन्हें समझाया था कि चोट क्रिकेट का हिस्सा है. उन्होंने यह भी कहा था कि वह घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं, इसलिए उनकी चोट पूरे परिवार के लिए चिंता का कारण बन जाती है.
रिंकू के करियर का सबसे यादगार पल वह था जब उन्होंने आईपीएल में यश दयाल के एक ओवर में लगातार पांच छक्के लगाकर टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई. उस मैच को उनके पिता खानचंद ने टीवी पर देखा था. बेटे की उस पारी को देख उनकी आंखें नम हो गई थीं.
ANI के साथ बाद में बातचीत में खानचंद ने कहा था कि उन्होंने रिंकू को कभी खास तैयारी नहीं कराई और न ही बल्ला खरीदकर दिया. वह चाहते थे कि बेटा पढ़ाई पर ध्यान दे क्योंकि उन्हें लगता था कि क्रिकेट से भविष्य नहीं बनता. लेकिन जब रिंकू ने लगातार रन बनाए और लोगों ने उनके खेल की तारीफ की, तब उन्होंने बेटे से कहा कि अगर वह सच में क्रिकेट खेलना चाहता है तो पूरे मन से खेले. 
आज जब रिंकू सिंह अपने करियर में आगे बढ़ रहे हैं, तो उनके संघर्ष और सफलता की कहानी में उनके पिता का विश्वास और योगदान हमेशा याद किया जाएगा. 
-Legend News

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