रिपोर्ट : LegendNews
गांधी प्रतिमा के सामने कल मनरेगा की बहाली के लिए उपवास कर विरोध जतायेंगे कांग्रेसी
मथुरा। जिला कांग्रेस कमेटी सेठबाड़ा स्थित कार्यालय पर काम के अधिकार "मनरेगा बचाओ संग्राम" हेतु एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई जिसमें बताया कि ग्रामीण आजीविकाओं पर इस गंभीर हमले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
जिला महासचिव मनोज गौड़ ने कहा कि यह अभियान 10 जनवरी से शुभारंभ होकर 25 फरवरी तक बैठक, धरना, प्रदर्शन आदि के माध्यम से विभिन्न कार्यक्रमों के तहत किया जाएगा, ताकि काम के अधिकार की रक्षा की जा सके और मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल किया जा सके। इसी के तहत कल दिनांक 11 जनवरी रविवार को प्रातः 11 बजे से उपवास एवं प्रतीकात्मक विरोध विकास मार्केट स्थित गांधी प्रतिमा पर किया जाएगा।
प्रेस को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश धनगर ने बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण युवा रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया था। एक अधिकार- आधारित कानून है जो प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार की मांग करने का वैधानिक अधिकार देता है जिसमें कानून के तहत राज्य सरकार 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देय होता है । यही वैधानिक गारंटी मनरेगा की मूल और विशेषता है।
मनरेगा ग्रामीण आजीविका सुरक्षा की रीढ़ रहा है। यह प्रतिवर्ष 5-6 करोड़ परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराता है, मजबूरी में होने वाले पलायन को रोकता है, ग्रामीण मजदूरी बढ़ाता है ,और टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण करता है। इसकी मांग-आधारिक संरचना, सुनिश्चित मजदूरी और सीधे बैंक भुगतान की व्यवस्था से विशेष रूप से महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और वंचित समुदायों को लाभ हुआ है, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी दारी कुल कार्यदिवसों का लगभग 60% है।
नया VB-GRAM-G अधिनियम इस पूरे ढांचे से एक मौलिक विचलन है। यह काम की वैधानिक गारंटी को समाप्त करता है, निर्णय प्रक्रिया का केंद्रीकरण केंद्र सरकार के हाथों में करता है, ग्राम सभाओं और पंचायतों को कमजोर करता है, तथा केंद्र के मजदूरी अंशदान को लगभग 90% से घटकर 60% कर देता है। जिससे वित्तीय बोझ राज्यों और श्रमिकों पर डाल दिया जाता है। बजट- सीमित आवंटन, कृषि के चरम मौसम में कार्य पर प्रतिबंध और मजदूरी सुरक्षा प्रावधानों का कमजोर होना अनिवार्य रूप से रोजगार में कमी, मजदूरों के दमन और ग्रामीण संकट में वृद्धि का कारण बनेगा।
कार्यक्रम से महात्मा गांधी के नाम को हटाया जाना भी श्रम की गरिमा और ग्राम स्वराज के उन मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास दर्शाता है, जिन पर मनरेगा आधारित है।
प्रेस भारत का संचालन प्रवक्ता उमाशंकर शर्मा ने किया। प्रेस वार्ता में उपाध्यक्ष रुपा लवानिया, अनाम धन्य तिवारी, राकेश शर्मा,अभय प्रताप सिंह, अप्रितम सक्सेना, दुर्गेश बघेल बलवीर धनगर, संदीप हिंडोल , शैलेंद्र चौधरी, पंकज चौधरी, रमेश कश्यप, आशीष अग्रवाल, जिलानी कादरी, रवि वाल्मीकि, विवेक कुमार, दिलशाद ,राजेश आदि कांग्रेसजन उपस्थित थे।
- Legend News

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