कांग्रेस सांसद शशि थरूर की तरफ से FCRA संशोधन बिल 2026 को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। सरकार ने इस बिल को अगले हफ्ते संसद में पेश करने को कहा है। इस पर थरूर ने कहा है कि नए नियम लागू होने के बाद सरकार को पहले से भी ज्यादा अधिकार मिल जाएंगे। उनका मानना है कि इससे कई सामाजिक संस्थाओं और सरकार के बीच काम करने का तरीका बदल सकता है। उन्होंने यह भी कहा है कि अगर किसी संस्था का एफसीआरए लाइसेंस खत्म हो जाता है या रद्द हो जाता है, तो उसकी विदेश की फंडिंग और खरीदी गई संपत्ति पर सरकार का कंट्रोल हो सकता है। शशि थरूर का क्या है कहना? शशि थरूर का कहना है कि इस बिल से सरकरा के अधिकार काफी ज्यादा बढ़ जाएंगे। उनके मुताबिक, अगर किसी संस्था का एफसीआरए बिल रद्द होता है या खत्म होता है, उसका रिन्यू ना हो, तो सरकार की तरफ से तय की गई संस्था उसकी विदेश फंडिंग और उससे बनी संपत्ति का प्रबंधन टेक ओवर कर पाएगी। उन्होंने कहा है कि इससे सरकार को जरूरत से ज्यादा ताकत मिल जाएगी। साथ ही सरकार और सामाजिक संस्थाओं के बीच का रिश्ता पूरी तरह से बदल जाएगा।
सामाजिक संस्थाओं को लेकर क्या बोले? थरूर ने कहा कि कई गैर-सरकारी संस्थाएं, चैरिटी ऑर्गनाइजेशन, थिंक टैंक और मानवाधिकार समूह लंबे समय से समाज के लिए काम कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार इन संस्थाओं को सहयोगी मानने की जगह उन पर शक करती है। उन्होंने कहा है कि विदेशी फंड मिलने में पहले से ही कई नियम लगाए जा चुके हैं, जिससे बहुत सी संस्थाओं के काम पर असर पड़ा है।
सरकार के आंकड़े क्या कहते हैं? गृह मंत्रालय के अनुसार, साल 2019 से 2022 के बीच 13,520 संस्थाओं को 55,741 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग मिली है। FCRA पोर्टल के मुताबिक 15 जुलाई 2026 तक 14,449 संस्थाओं के लाइसेंस एक्टिव हैं। वहीं 22,498 लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं और 15,212 लाइसेंस की समय सीमा पूरी हो चुकी है। 
-Legend News

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