मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाईकोर्ट और जनपद न्यायालय के के अधिवक्ताओं को पांच लाख रुपये कैशलेस इलाज की सुविधा का तोहफा दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में पहुंचे सीएम ने कहा कि अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ लाख से बढ़ाकर पांच लाख करने का एलान किया। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए जो भी प्रस्ताव हाईकोर्ट की तरफ से आएगा उसमें राज्य सरकार पूरा सहयोग करेगी।  उन्होने युवा अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वह सिर्फ व्यवसायिक ही नहीं बल्कि न्यायपालिका की मजबूती और आम जनता में न्याय के प्रति भरोसा बढ़े इस दिशा में भी कार्य करें।  
योगी ने हिंदी दिवस, हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी के अवसर पर आस्था की इस पवित्र भूमि प्रयागराज से सभी को बधाई। कहा कि गणपति को हमारी आध्यात्मिक विरासत में बुद्धि, विवेक और न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है। हरितालिका तीज भी हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है। 
स्वतंत्रता आंदोलन में प्रयागराज अमूल्य योगदान
देश के प्रबुद्ध समाज में अधिवक्ता समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समाज की विचारधारा को दिशा देने और उसके विश्वास का प्रतीक बनने में अधिवक्ताओं का योगदान रहा है। संविधान निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से लेकर स्वतंत्र भारत में शासन-प्रशासन की व्यवस्था के संचालन और लोकतंत्र के सभी स्तंभों को मजबूती प्रदान करने तक अधिवक्ता समाज की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 
प्रयागराज की धरती इसकी गवाह रही है। अनेक ऐसे अधिवक्ता रहे हैं, जिन्होंने इलाहाबाद में विधि व्यवसाय किया और स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। मोतीलाल नेहरू और महामना मदन मोहन मालवीय जैसे नाम देश के स्वतंत्रता आंदोलन को लंबे समय तक आगे बढ़ाने वालों में रहे। वे हर क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी के लिए खड़े होते दिखाई दिए।
400 राज्य विधि अधिकारियों को मिलेगा टैबलेट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आधुनिक तकनीकी से जोड़ने के सरकार 400 विधि अधिकारियों को टैबलेट देगी। जिससे शासन के कौन से  मुकदमे कोर्ट में चल रहे हैं इसकी जानकारी उनको मिलती रहेगी।  
राजेंद्र प्रसाद की भारतीय संस्कृति में थी आस्था
प्रयागराज आने पर जब संगम में डुबकी लगाते हैं तो देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का स्मरण होता है। प्रत्येक कुंभ के दौरान उनका यहां प्रवास होता था। वे माघ मेले में कल्पवास भी करते थे। उनका कल्पवास केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक साधना का विषय नहीं था, बल्कि उन्होंने राष्ट्र जीवन के लिए जो मर्यादा तय की थी और राष्ट्रसेवा का जो संकल्प लिया था, उन आदर्शों का यहां पालन किया।
कुंभ और माघ मेले के दौरान उनका लंबे समय तक रहना भारत की विरासत और जनआस्था के प्रति उनके गहरे सम्मान का उदाहरण था। राष्ट्रपति बनने के बाद जब उन्हें सोमनाथ मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया तो उन्होंने स्वयं इसमें भाग लेकर स्वतंत्र भारत की सांस्कृतिक चेतना और गौरवशाली विरासत को सम्मान देने का कार्य किया। यह आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का विषय है।
हमारी सरकार ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम पर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय स्थापित करने का संकल्प लिया है। विश्वविद्यालय का कार्य प्रारंभ हो चुका है और इसका भव्य परिसर भी बहुत जल्द तैयार होगा। प्रयागराज की धरती ने भारत की संवैधानिक चेतना और विधिक विमर्श को दिशा दी है। यहां से अनेक न्यायविद, अधिवक्ता और जननेता निकले, जिन्होंने भारत की संवैधानिक और राजनीतिक दिशा में मील के पत्थर स्थापित किए।
बार और बेंच न्याय व्यवस्था के पहिये
लोकतंत्र के तीनों प्रमुख स्तंभ अपनी-अपनी व्यवस्था के अनुसार कार्य करते हैं। इनके बीच समन्वय से ही लोकतंत्र मजबूत होता है। भारतीय लोकतंत्र में न्यायपालिका सुशासन के लक्ष्यों को प्राप्त करने और विधि का शासन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
बार और बेंच न्याय व्यवस्था के रथ के दो पहिए हैं। दोनों के बीच सदैव समन्वय दिखाई देना चाहिए। न्याय प्रशासन के लिए आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद और सहयोग बार-बेंच के बीच निरंतर बना रहना चाहिए।
2017 से पहले हमारे सामने चुनौती संसाधनों की ही नहीं, बल्कि व्यवस्था की थी। प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही, कानून-व्यवस्था तथा न्यायिक आधारभूत ढांचे से जुड़ी अनेक चुनौतियां थीं।
पुलिस के प्रशिक्षण की व्यवस्था बदली
2017 से पहले उत्तर प्रदेश पुलिस में करीब 45 से 50 प्रतिशत पद खाली थे। जब भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई तो प्रशिक्षण क्षमता भी सीमित थी। उत्तर प्रदेश पुलिस एक वर्ष में लगभग तीन हजार प्रशिक्षुओं को ही प्रशिक्षण दे पाती थी। बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। हमने प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाकर सात हजार की और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराईं।
हर जनपद में पुलिस के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। जो लोग 12-12 घंटे ड्यूटी करते हैं, उनके लिए बेहतर आवासीय और अन्य सुविधाएं होना जरूरी है। यदि हम रक्षक के रूप में पुलिस से बेहतर भूमिका की अपेक्षा करते हैं तो उन्हें आवश्यक सुविधाएं देना भी हमारी जिम्मेदारी है।
इसी प्रकार न्यायपालिका के पास भी बेहतरीन आधारभूत सुविधाएं होनी चाहिए। अधीनस्थ न्यायालयों की दशा पहले खराब थी। कई न्यायालय किराए के भवनों में चल रहे थे। अधिवक्ताओं के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं थी।
उत्तर प्रदेश में पूरी व्यवस्था को बदलने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं। पहले गंभीर अपराधों के मामलों में गवाहों के मुकर जाने से दोषियों को सजा दिलाना चुनौती बन जाता था। अपराधियों को जेल से अदालत लाने के लिए जर्जर और असुरक्षित वाहनों का इस्तेमाल होता था और हमलों की शिकायतें भी आती थीं। 
-Legend News

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