रांची के चर्चित भूमि घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से जारी समन की अवहेलना के आरोप से जुड़े केस में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से झटका लगा है। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की बेंच ने इस मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे केस को निरस्त करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस मामले में मुख्यमंत्री को निचली अदालत में उपस्थित होने से पहले ही छूट प्रदान की है। ईडी की शिकायत पर एमपी-एमएलए कोर्ट ने संज्ञान लेने के बाद न्यायिक कार्यवाही शुरू की थी। मुख्यमंत्री ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और साथ ही इसे खारिज करने की मांग की थी। ईडी ने फरवरी 2024 में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) अदालत में हेमंत सोरेन के खिलाफ शिकायतवाद दर्ज कराया था। एजेंसी का आरोप है कि रांची के बड़गाईं अंचल से जुड़े कथित जमीन घोटाले में पूछताछ के लिए उन्हें कई बार समन भेजे गए थे। ईडी के अनुसार, पहली बार 14 अगस्त 2023 को समन भेजा गया था। इसके बाद 2023 में 19 अगस्त, 1 सितंबर, 17 सितंबर, 26 सितंबर, 11 दिसंबर, 29 दिसंबर और 2024 में 13 जनवरी, 22 जनवरी तथा 27 जनवरी को भी समन भेजे गए। इस तरह कुल 10 समन जारी हुए, लेकिन हेमंत सोरेन केवल दो समन पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।
एजेंसी का दावा है कि यह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की धारा 63 तथा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 174 का उल्लंघन है। सीजेएम कोर्ट ने इस शिकायत पर 4 मार्च 2024 को संज्ञान लिया था, जिसके बाद मामला एमपी-एमएलए विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया।
हेमंत सोरेन ने संज्ञान लेने की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि जिन समनों पर वह उपस्थित नहीं हुए थे, उनका लिखित जवाब उन्होंने ईडी को भेज दिया था। पुराने समन लैप्स होने के बाद नए समन पर उन्होंने हाजिरी दी थी और एजेंसी के निर्देशों का अनुपालन किया था। उनका कहना है कि ईडी ने दुर्भावना से प्रेरित होकर अनावश्यक रूप से बार-बार समन भेजे। 
-Legend News

मिलती जुलती खबरें

Recent Comments

Leave A Comment

Don’t worry ! Your Phone will not be published. Required fields are marked (*).