रिपोर्ट : LegendNews
हिंसा में कॉकरोचों की जवाबदेही तय करने लिए दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए तैयार सीजेआई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (3 अगस्त 2026) को 20 जुलाई को नीट पेपर लीक के खिलाफ 'संसद चलो' अभियान के दौरान हुई हिंसा में आयोजकों की जवाबदेही तय करने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। यह याचिका एयर फोर्स के एक रिटायर अफसर की ओर से डाली गई है।
सोमवार को एक वकील ने भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत की बेंच में मौखिक रूप से आयोजकों के रोल का जिक्र करते हुए कहा कि आयोजक 20 जुलाई से बजाए 'आग को बुझाने के आग को भड़का रहे थे।'
लाइव लॉ के अनुसार एक पूर्व एयर फोर्स अफसर की ओर से दायर याचिका के बारे में वकील रिजवान अहमद ने सीजेआई सीर्यकांत से तत्काल लिस्टिंग की मांग की।
आयोजकों की भी जवाबदेही तय हो
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि 20 जुलाई से आयोजक सरकार के लगातार उदार रवैया देखने के बावजूद लगातार भड़काऊ बयान देते रहे।
सरकार की ओर से बहुत उदार रवैया अपनाने के बाद भी आयोजकों की ओर से आग को भड़काया जाता रहा। आयोजकों ने गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए और समाज में कड़वाहट पैदा की गई। आयोजकों की भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
शांतिप्रिय नागरिकों के मन में असंतोष
याचिका में 20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद गिरफ्तारी और एफआईआर दर्ज करने में समान राष्ट्रीय नीति अपनाए जाने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि एफआईआर वापस लेने के लिए भी अलग-अलग प्रक्रिया अपनाई गई है, जिससे जनता में अनिश्चितता की स्थिति पैदा हुई है।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, 'अलग-अलग राज्यों में गिरफ्तारी और एफआईआर को लेकर अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी की जा रही है। यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है। यहां एक तरह की नीति अपनाने की जरूरत है। देश के शांतिप्रिय नागरिकों के मन में इससे असंतोष पैदा हो रहा है।'
युवाओं से कम्युनिटी सर्विस कराने का सुझाव
याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया पर अपशब्द वाले वीडियो पोस्ट करने के लिए नाबालिगों और युवाओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
वकील ने कहा कि हालांकि ऐसे बर्ताव में सुधार आवश्यक है, लेकिन आपराधिक मुकदमा चलाने का उल्टा असर हो सकता है।
उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि ऐसे नाबालिगों के लिए ऐसी नीति की जरूरत है, जिसमें उनपर आपराधिक मुकदमा लगाने की जगह उनसे कम्युनिटी सर्विस कराई जाए।
सुप्रीम कोर्ट से याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, 'एक यूनिफॉर्म पॉलिसी होनी चाहिए, जिसके तहत उन्हें कम से कम सात दिनों के लिए कम्युनिटी सर्विस में भेजा जाए और फिर उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। लेकिन, कोई एफआईआर न दर्ज हो। इससे समाज में और अधिक कड़वाहट पैदा होगी। यह जरूरी है।'
सीजेआई ने जल्द सुनवाई का भरोसा दिया
याचिकाकर्ता के वकील को सुनने के बाद सीजेआई सूर्यकांत ने जल्द सुनवाई का भरोसा दिया। सीजेआई ने कहा, हम याचिका पर कल सुनवाई करेंगे या बहुत ज्यादा संभव है कि परसों।
-Legend News

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